ग्रीष्मकालीन पेयजल संकट के समाधान के लिए सभी प्रखंडों में नीर चौपाल का आयोजन

ग्रीष्मकालीन पेयजल संकट के समाधान के लिए सभी प्रखंडों में नीर चौपाल का आयोजन

10 Apr 2026 |  8

 



पूर्वांचल सूर्य प्रतिनिधि 



हजारीबाग।ग्रीष्मकाल के दौरान उत्पन्न पेयजल संकट के मद्देनज़र आमजनों को स्वच्छ और पर्याप्त पेयजल उपलब्ध कराने के के लिए उपायुक्त शशि प्रकाश सिंह के निर्देशानुसार जिले के सभी प्रखंडों में नीर चौपाल का आयोजन किया गया। इस पहल का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल से संबंधित समस्याओं की पहचान कर उनके त्वरित समाधान के लिए कार्य योजना तैयार करना है।सभी प्रखंडों में आयोजित नीर चौपाल के दौरान संबंधित प्रखंड विकास पदाधिकारियों की उपस्थिति में जनप्रतिनिधियों, संबंधित विभागीय पदाधिकारियों, जल सहिया और आम लोगों की सहभागिता सुनिश्चित की गई। इस अवसर पर क्षेत्र के चापानलों से जुड़ी समस्याओं को विस्तारपूर्वक सूचीबद्ध किया गया।



सूचीबद्ध समस्याओं को संकलित कर विकास शाखा और पेयजल एवं स्वच्छता प्रमंडल के कार्यपालक अभियंता को उपलब्ध कराया जाएगा, ताकि इन समस्याओं के त्वरित निवारण के लिए समुचित और प्रभावी कार्य योजना तैयार की जा सके।इसके अतिरिक्त नीर चौपाल के दौरान प्रत्येक प्रखंड में पेयजल आपूर्ति के लिए उपलब्ध टैंकरों का आकलन भी किया गया।आवश्यकतानुसार खराब टैंकरों की मरम्मत सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि जलापूर्ति में किसी प्रकार की बाधा उत्पन्न न हो। 



नीर चौपाल में पीवीटीजी क्षेत्रों में पेयजल की समस्या उत्पन्न न हो इसका विशेष ख्याल रखने और टैंकरों के माध्यम से पानी उपलब्ध कराने और इसकी नियमित मॉनिटरिंग करने का निर्देश संबंधित पदाधिकारियों को दिया गया। जनसामान्य की सुविधा के लिए पेयजल संकट से संबंधित शिकायतों के निवारण के लिए फोन नंबर 06546-262291 और एआई चैटबॉट नंबर 8757864361 की जानकारी भी साझा की गई।लोग इन माध्यमों के जरिए अपने क्षेत्र के खराब चापानलों की शिकायत स्वयं दर्ज करवा सकते हैं,जिससे पेयजल संबधी समस्याओं का शीघ्र समाधान सुनिश्चित किया जा सके। 



नीर चौपाल के दौरान जल संरक्षण को सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से अधिकारियों को निर्देशित किया गया कि सरकार की विभिन्न जल संरक्षण योजनाओं को धरातल पर प्रभावी रूप से क्रियान्वित किया जाए। विशेष रूप से डोभा निर्माण, वर्षा जल संचयन, जलस्रोतों का पुनर्जीवन, तालाबों की मरम्मत एवं गहरीकरण जैसे कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर आगे बढ़ाने का निर्देश दिया गया। साथ ही, यह भी सुनिश्चित करने को कहा गया कि इन योजनाओं का लाभ वास्तविक जरूरतमंद क्षेत्रों विशेषकर पीवीटीजी क्षेत्रों तक पहुंचे और स्थानीय जनप्रतिनिधियों आम लोगों की सहभागिता के साथ कार्यों की सतत निगरानी की जाए, ताकि ग्रीष्मकाल में उत्पन्न जल संकट का स्थायी समाधान सुनिश्चित किया जा सके।


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