लखनऊ।उत्तर प्रदेश की एंटी टेरर स्क्वॉड ने फर्जी भारतीय दस्तावेज तैयार करने वाले अंतर्राज्यीय गिरोह के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है।गिरोह लंबे समय से रोहिंग्या,बांग्लादेशी और अन्य विदेशी नागरिकों को भारतीय नागरिक बताने के लिए फर्जी आधार कार्ड,पासपोर्ट और अन्य प्रमाणपत्र उपलब्ध करा रहा था।अब इस मामले में एटीएस को कई चौंकाने वाले तथ्य हाथ लगे हैं।
सूत्रों के मुताबिक गिरोह की मदद से तैयार कराए गए फर्जी पासपोर्ट से कई घुसपैठियों ने खाड़ी देशों की यात्रा की है।यूपी एटीएस इस पूरे नेटवर्क की गहन जांच करने में जुटी है। एटीएस ने विदेशी कनेक्शन की भी पड़ताल शुरू कर दी है।अब तक एटीएस इस मामले में 10 को गिरफ्तार कर चुकी है।
हाल ही में इस गिरोह से जुड़े अक्षय सैनी और तालिब अंसारी को एटीएस ने सहारनपुर से गिरफ्तार किया था।एटीएस को इस गिरोह के गिरफ्तार लोगों के पास से 20 से अधिक लैपटॉप और कई इलेक्ट्रॉनिक उपकरण मिले हैं,जिनके डाटा की जांच जारी है।पुलिस रिमांड पर पूछताछ के दौरान अक्षय सैनी और राजीव तिवारी से कई अहम जानकारियां मिलने का दावा किया जा रहा है।
जांच में सामने आया है कि गिरोह का नेटवर्क उत्तर प्रदेश के आजमगढ़,गोरखपुर,सहारनपुर, मऊ और औरैया तक ही सीमित नहीं था,बल्कि इसका नेटवर्क पश्चिम बंगाल के मुर्शीदाबाद और कोलकाता,बिहार के लखीसराय और कटिहार के अलावा दिल्ली-एनसीआर तक फैला हुआ था।
एटीएस की जांच से खुलासा हुआ है कि गिरोह के सदस्य जन सेवा केंद्रों की आड़ में यह अवैध कारोबार चलाते थे।वीपीएन और रिमोट सिस्टम कंट्रोल की मदद से आधार कार्ड बनाने वाली अधिकृत एजेंसियों के सिस्टम तक पहुंच बनाई जाती थी। इसके बाद विदेशी नागरिकों के नाम पर जन्म प्रमाणपत्र, निवास प्रमाणपत्र और शपथ पत्र जैसे कूट रचित दस्तावेज तैयार किए जाते थे। इन्हीं दस्तावेजों की मदद से उन्हें आधार कार्ड और पासपोर्ट जारी करा दिए जाते थे।
फर्जी आधार कार्ड बनवाने के बाद ये विदेशी नागरिक न केवल पासपोर्ट हासिल कर रहे थे बल्कि कई सरकारी योजनाओं का अनुचित लाभ भी उठा रहे थे।एटीएस अब इस बात की पड़ताल कर रही है कि प्रदेश में कितने घुसपैठियों को इस गिरोह ने भारतीय पहचान दिलाई और किन-किन देशों की यात्राएं कराई गईं। जांच एजेंसी ने साफ किया है कि पूरे मामले की तह तक जाकर कार्रवाई की जाएगी।