रांची की पहली आदिवासी महिला मेयर रमा खलखो का कार्यकाल स्वर्णिम युग,मेयर पद की दौड़ में सबसे आगे:हृदयानंद मिश्र

रांची की पहली आदिवासी महिला मेयर रमा खलखो का कार्यकाल स्वर्णिम युग,मेयर पद की दौड़ में सबसे आगे:हृदयानंद मिश्र

14 Feb 2026 |  37

 



रांची।जन आंदोलन से निकले नेतृत्व ने कैसे राजधानी रांची को पहली बार संवेदनशील और सहभागी शहरी शासन की दिशा दी।झारखंड राज्य के गठन के बाद जब रांची को राजधानी बनाया ग़या तब मेरे जैसे अनेक लोंगो के मन में यह विश्वास जगा था कि अब इस शहर का समुचित और सुनियोजित विकास होगा।राजधानी का दर्जा अपने साथ उम्मीद भी लाता है बेहतर नागरिक सुविधाएं जवाबदेह शासन और जनभागीदारी से चलने वाला प्रशासन,लेकिन उस समय यह साफ़ दिखा रहा था कि जब तक तीसरे स्तर की सरकार यानी निर्वाचित नगर निगम अस्तित्व में नहीं आयेगा,तब तक यह सारी उम्मीद अधूरी ही अधूरी रहेगी।इसी कारण नगर निकाय चुनाव को लेकर जनदबाव और आंदोलन तेज होते जाते रहे थे।



मैंने स्वयं देखा और महसूस किया कि किस तरह सामाजिक कार्यकर्ताओं और जान आंदोलन से जुड़े लोंगो ने सरकार पर लगातार दबाव बनाया।इन्हीं आंदोलन के बीच से रमा खलखो का नेतृत्व उभरकर सामने आया।वे झारखंड जनाधिकार मंच के माध्यम से लगातार यह सवाल उठा रहीं थीं कि बिना निर्वाचित नगर निकाय के रांची का भविष्य आंधकारमय रहेगा।अखिरकार वर्ष 2008 में नगर निगम चुनाव की घोषणा हुई।यह चुनाव गैर दलिय आधार पर हुआ,जिसने इसे और भी चुनौतीपूर्ण बना दिया।किसी भी प्रत्याशी के पार्टी का चुनाव चिन्ह या संगठनात्मक ढाल नहीं थी।सबको अपने व्यक्तितत्व,संघर्ष और जनता के भरोसे पर चुनाव लड़ना था। रांची की मेयर सीट आदिवासी महिला के लिए आरक्षित थी, इसलिए यह तय था कि शहर को पहली बार एक आदिवासी महिला नेतृत्व देने जा रहा है।



इस एतिहासिक अवसर पर रमा खलखो ने चुनाव लड़ा और लगभग 46 हजार मतों के साथ विजय प्राप्त की।उस दिन मुझे यह महसूस हुआ कि रांची को सिर्फ एक मेयर नहीं मिली, ब्लकि उसे एक एसा नेतृत्व मिला जो आंदोलन की आड़ में तपकर आया था। इस तरह रांची को उसकी पहली आदिवासी महिला मेयर मिली,यह केवल एक राजनीतिक घटना नहीं,ब्लकि सामाजिक न्याय और लोकतांत्र की बड़ी उपलब्धि थी। यह भी पहली बार हुआ था कि मेयर और डिप्टी मेयर का सीधा चुनाव जनता ने किया। मतदान के प्रति आम लोंगो का उत्साह अभूतपूर्व था। स्वाभाविक रूप से नगर निगम से अपेक्षाएं भी बहुत अधिक थी।रमा खलखो के नेतृत्व में गठित पहली निर्वाचित बोर्ड ने अपने पांच वर्षों के कार्यकाल में यह कोशिश की कि विकास का लाभ सामाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक पहुंचे।



मुझे याद है कि उस समय रांची को स्वच्छ और सुंदर शहर बनाने का संकल्प लिया ग़या था।रमा खलखो के नेतृत्व में नगर निगम ने पहली बार सालिड बेस्ट मैनेजमेंट सिस्टम को व्यवस्थित ढंग से लागू किया।इसके लिए एटुजेड कम्पनी का चयन किया ग़या। घर-घर कचरा उठाने की व्यवस्था शुरू हुई,प्रत्येक घर को गीले और सूखे कचरे कचरे के लिए अलग से डस्टबीन दिए गए और कचरे का निष्पादन वैज्ञानिक पद्धति से इटकी डंप यार्ड में होने लगा। इससे शहर मे स्वच्छता को लेकर एक नई  चेतना पैदा हुई।



इसी कार्यकाल में शहरी जलापूर्ति योजना पर गंभीरता से काम शुरू हुआ।जेएनएनयूआरएम योजना के तहत नगर निगम ने पहली बार 70 सिटी बसों की खरीदारी की,जिससे सार्वजानिक परिवहन को नई गति मिली।बेघर और शहरी गरीबों के लिए मधुकम खादगढ़ा,मधुकम रूगड़ीगाड़ा,चिरौंदि और नामकुम में आवासीय योजनाएं शुरू की गई। ये सभी प्रयास इस बात का प्रमाण थे कि इच्छा शक्ति हो तो सीमित संसाधनो में भी बड़े बदलाव सम्भव है 



मेरे लिए यह भी उल्लेखनीय रहा कि रमा खलखो के कार्यकाल में नगर निगम की अर्थिक स्थिति को सुदृढ़ करने पर विशेष ध्यान दिया ग़या।जब वे मेयर बनी थीं तब नगर निगम का वार्षिक राजस्व लगभग 8 करोड़ रुपये था।भवन नक्शा स्वीकृत,होल्डिंग टैक्स जलकर संग्रह व्यवस्था को दुरुस्त कर राजस्व बढ़ाने की दिशा ठोस कदम उठाए गए।परिणामस्वरुप कुछ ही वर्षों में निगम की आय बढ़कर लगभग 15 करोड़ रुपये तक पहुंच गई।जब लोंगो को बेहतर सुविधाएं मिलने लगी तो उन्होंने भी कर भुगतान को अपनी जिम्मेदारी के रूप मे स्वीकार किया।



जब पिछे मुड़कर देखा हूं तो यह साफ़ नजर आता है कि रमा खलखो का मेयर बनना रांची के शहरी इतिहास का महत्वपूर्ण मोड़ था,उनका नेतृत्व इस बात का उदाहरण है कि आंदोलन से निकला व्यक्ति सता में आने के बाद भी संवेदनशील और जवाबदेह भी रह सकता है।यह कार्यकाल हमे यह भी सिखाता है कि लोकतंत्र केवल चुनाव जीतने का नाम नहीं,बल्कि जनता के भरोसे को नीतियों और कर्मों में बदलने की प्रक्रिया है।रांची की पहली आदिवासी महिला मेयर के रूप मे रमा खलखो का योगदान आने वाली पीढ़ियों  के लिए प्रेरणा रहेगा। यह हमे याद दिलाता है यदि नेतृत्व जमीन से जुड़ा हो तो शहरों की दिशा और दशा दोनों बदली जाती सकती है।



रमा खलखो एक बार फिर रांची नगर निगम मेयर पद के लिए चुनाव मैदान मे हैं,उनके इस राजनीतिक प्रयास के लिए उन्हें हार्दिक शुभकामनाएं।



(लेखक हृदयानंद मिश्र एडवोकेट एवं वैचारिक विश्लेषक,

सदस्य हिन्दू धार्मिक न्यास बोर्ड झारखंड सरकार)


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