राजा भ‌इया के छोटे बेटे क्यों हुए सक्रिय,क्या 2027 में बदलेगी कुंडा की सियासत 

राजा भ‌इया के छोटे बेटे क्यों हुए सक्रिय,क्या 2027 में बदलेगी कुंडा की सियासत 

08 Jul 2026 |  18

 



प्रतापगढ़।उत्तर प्रदेश में विरासत में सियासत मिलना नई बात नहीं है।मुलायम सिंह यादव के परिवार से लेकर चौधरी अजित सिंह,कल्याण सिंह,स्वामी प्रसाद मौर्य,राजनाथ सिंह और कई बड़े नेताओं के बेटे-बेटियां सियासत में हैं।अब सवाल उत्तर प्रदेश के बड़के जिले प्रतापगढ़ के सबसे चर्चित सियासी परिवार पर टिक गया है।यूपी की सियासत में कुंडा एक बार फिर चर्चा के केंद्र में है।कारण है राजा भ‌इया के जुड़वां बेटे शिवराज प्रताप सिंह (बड़े) और बृजराज प्रताप सिंह (छोटे) इन्होंने जनसत्ता दल लोकतांत्रिक की सदस्यता लेकर सक्रिय सियासत में कदम रख दिया है। 2027 विधानसभा चुनाव में राजा भ‌इया के दोनों बेटों की उम्र भी चुनाव लड़ने की पात्रता के करीब होगी।ऐसे में सवाल उठने लगे हैं कि क्या कुंडा से विधायक जनसत्ता दल लोकतांत्रिक पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भ‌इया भी अपनी तीन दशक पुरानी सियासी विरासत अब अगली पीढ़ी को सौंपने की तैयारी कर रहे हैं या फिर कुंडा की कमान अभी भी उनके ही हाथों में रहेगी।



विधानसभा चुनाव से पहले कुंडा में सक्रिय हुए राजा भ‌इया दोनों के बेटे



इस सवाल का कारण भी है।राजा भ‌इया के जुड़वां बेटे शिवराज प्रताप सिंह और बृजराज प्रताप सिंह अब सियासत की जमीन पर कदम रख चुके हैं। 2027 विधानसभा चुनाव तक दोनों की उम्र लगभग 24 वर्ष होगी।अगर विधानसभा चुनाव तय समय पर होता है और नामांकन के समय तक उनकी उम्र 25 वर्ष पूरी हो जाती है तो वे विधानसभा चुनाव लड़ने के पात्र हो सकते हैं।प्रतापगढ़ की सियासत में सबसे बड़ी चर्चा ये है कि क्या 2027 में कुंडा या आसपास की किसी सीट से राजा भ‌इया के बेटे चुनावी एंट्री करेंगे।



26 साल की उम्र में विधायक बने थे राजा भ‌इया 



रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भ‌इया ने जब सियासी जमीन पर कदम रखा था तब उनकी उम्र लगभग 26 साल थी।राजा भ‌इया  ने 1993 में पहली बार कुंडा से निर्दलीय चुनाव लड़ा और जीत दर्ज की।जिले के बहुत कम लोगों ने सोचा था कि युवा राजा भ‌इया अगले तीन दशक तक कुंडा की सियासत का सबसे बड़ा चेहरा बन जाएंगे। आज 33 साल बाद फिर वही दिख रहा है।फर्क सिर्फ इतना है कि इस बार चर्चा राजा भ‌इया की नहीं,बल्कि उनके बेटों की हो रही है।



पहले परिवार में नहीं था कोई सक्रिय नेता



राजा भ‌इया भदरी रियासत के राजा उदय प्रताप सिंह के बेटे हैं।राजा भ‌इया के दादा राजा बजरंग बहादुर सिंह प्रसिद्ध शिक्षाविद् थे और पंतनगर विश्वविद्यालय के पहले कुलपति रहे।पिता उदय प्रताप सिंह राजपरिवार के प्रमुख थे,लेकिन सक्रिय सियासत में नहीं आए।परिवार की सियासत की विरासत की शुरुआत खुद राजा भ‌इया ने की।अब सवाल यह है कि क्या उसके अगले अध्याय की जिम्मेदारी उनके बेटे संभालेंगे।



आखिर कौन हैं बड़ा और छोटा



राजा भ‌इया के दो बेटे और दो बेटियां हैं।शिवराज प्रताप सिंह और बृजराज प्रताप सिंह जुड़वां हैं।इनका जन्म 2003 में हुआ था।मुंबई विश्वविद्यालय से ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की है।अब तक सार्वजनिक जीवन से काफी दूर रहे,लेकिन पिछले कुछ सालों में दोनों बेटे लगातार राजनीतिक कार्यक्रमों में राजा भ‌इया के साथ नजर आने लगे हैं।राजा भ‌इया के होने पर छोटे बेटे बृजराज प्रताप सिंह ही जनसुनवाई और जनता दरबार में बैठते हैं।अक्‍सर सोशल मीडिया पर उनके वीडियो भी वायरल होते रहते हैं।स्‍थानीय लोग अब उन्‍हें भी शिवराज को बडे राजा और बृजराज छोटे राजा की उपाधि भी दे चुकै हैं,उनका लोगों से मिलना जुलना और कुंडा और नवाबगंज दोनों विधानसभाओं में भ्रमण चर्चा का विषय बना हुआ है। साथ ही 2027 के विधानसभा चुनाव की चर्चा को बल मिल रहा है।कुंडा से राजा भ‌इया विधायक हैं वहीं उनकी पार्टी जनसत्ता दल के प्रदेश अध्‍यक्ष विनोद सरोज बगल की विधानसभा सीट बाबागंज से विधायक है।ऐसे में ये दोनों सीटें राजा के प्रभाव वाली मानी जाती है।



2003 में जन्म और पिता जेल में



दोनों बेटों के जन्म से जुड़ा एक दिलचस्प वाकया अक्सर चर्चा में आता है। 2003 में जब दोनों का जन्म हुआ,उस समय बसपा की सरकार थी और मायावती मुख्यमंत्री थीं।इस दौरान राजा भ‌इया जेल में थे।लगभग 10 महीने तक जेल में रहने से राजा भ‌इया अपने नवजात बेटों का चेहरा भी नहीं देख पाए थे।बाद में सियासी हालात बदले,भाजपा के समर्थन से बनी मायावती की सरकार गिर गई और मुलायम सिंह यादव ने बसपा के बागियों के समर्थन से अपनी सरकार बना ली।तब मुलायम सिंह यादव ने राजा भ‌इया के खिलाफ दर्ज किए गए मामलों को वापस लेने की प्रक्रिया शुरू की।राजा भ‌इया जेल से बाहर आए मंत्री भी बने।



जनसत्ता दल की सदस्यता और सियासत में एंट्री



सियासी अटकलों को उस समय और मजबूती मिली जब अप्रैल 2025 में दोनों भाइयों ने जनसत्ता दल लोकतांत्रिक की प्राथमिक सदस्यता ग्रहण की।कुंडा के बाबूगंज में पार्टी कार्यालय में आयोजित कार्यक्रम में राजा भ‌इया के चचेरे भाई अक्षय प्रताप सिंह (गोपाल जी), पार्टी के वरिष्ठ नेता, राष्ट्रीय महासचिव डॉ.के.पी.ओझा, प्रदेश अध्यक्ष विनोद सरोज और जिलाध्यक्ष राम अंचल वर्मा की मौजूदगी में दोनों को पार्टी की सदस्यता दिलाई गई।यहीं से साफ संकेत मिला कि अब दोनों सिर्फ राजनीतिक कार्यक्रमों में मौजूद रहने वाले चेहरे नहीं, बल्कि पार्टी के सक्रिय कार्यकर्ता बन चुके हैं।



सियासी मंचों पर पहले से ही दिखने लगे थे सक्रिय



भले ही राजा भ‌इया के दोनों बेटों को पार्टी की सदस्यता 2025 में मिली हो,लेकिन उससे पहले भी दोनों बेटे कई सार्वजनिक कार्यक्रमों में राजा भ‌इया के साथ नजर आते रहे हैं।कुंडा से लेकर राजधानी लखनऊ तक राजनीतिक बैठकों में उनकी मौजूदगी बढ़ती गई। 2022 विधानसभा चुनाव में भी दोनों ने चुनाव प्रचार में सक्रिय भूमिका निभाई थी।स्थानीय कार्यकर्ताओं के बीच उनकी पहचान उसी समय बनने लगी थी।



क्या 2027 में लड़ सकते हैं चुनाव



सबसे बड़ा सवाल ये है कि भारत में विधानसभा चुनाव लड़ने के लिए न्यूनतम उम्र 25 वर्ष होना जरूरी है।इस हिसाब से देखें तो राजा भ‌इया के दोनों बेटों का जन्म 2003 में हुआ।अगर 2027 का विधानसभा चुनाव अपने निर्धारित समय पर होता है और नामांकन तक उनकी उम्र 25 वर्ष पूरी हो जाती है तो वे कानूनी रूप से चुनाव लड़ने के पात्र होंगे।इसी वजह से सियासी गलियारों में चर्चा है कि राजा भ‌इया शायद अभी से अगली पीढ़ी को तैयार कर रहे हैं।हालांकि अभी तक राजा भ‌इया या जनसत्ता दल की ओर से इस बारे में कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।



राजा भ‌इया का सियासी सफर माना जाता है खास



उत्तर प्रदेश में राजा भ‌इया चुनिंदा नेताओं में हैं।राजा भ‌इया ने बिना किसी बड़े राष्ट्रीय दल के सहारे अपनी अलग सियासी पहचान बनाई। 1993 में 26 साल की उम्र में राजा भ‌इया पहली बार विधायक बने।इसके बाद राजा भ‌इया लगातार सात चुनाव जीते,1993 से 1996, 2002, 2007, 2012, 2017 और 2022 सभी चुनावों में राजा भ‌इया लगातार विजयी रहे,इससे राजा भ‌इया का रसूक हमेशा से चर्चा में रहता है। लगभग 33 सालों से कुंडा विधानसभा में राजा भ‌इया का दबदबा कायम है। राजा भ‌इया आज तक कुंडा से चुनाव नहीं हारे हैं।



कुंडा ही नहीं,बाबागंज पर भी जबरदस्त पकड़



राजा भ‌इया का दबदबा सिर्फ कुंडा तक सीमित नहीं है,उनकी पार्टी जनसत्ता दल लोकतांत्रिक ने 2022 विधानसभा चुनाव में दो सीटें जीती थीं।कुंडा से राजा भ‌इया और बाबागंज (आरक्षित)से विनोद कुमार।कुंडा और बाबागंज विधानसभा में आज भी राजा भ‌इया का बहुत मजबूत जनाधार है। अटकलों का बाजार गर्म है कि राजा भ‌इया आगामी विधानसभा चुनाव में एक बेटे को किसी एक सीट से उतार सकते हैं।



क्या बेटे संभालेंगे कुंडा की कमान



बरहाल इसका जवाब किसी के पास नहीं है।मगर सियासी संकेत लगातार मिल रहे हैं।दोनों बेटे पार्टी के सदस्य बन चुके हैं,सियासी कार्यक्रमों में लगातार सक्रिय हैं,कार्यकर्ताओं से संपर्क बढ़ा रहे हैं। 2027 तक चुनाव लड़ने की उम्र के करीब पहुंच जाएंगे।अगर सब कुछ सियासी रणनीति के मुताबिक चला तो 2027 का चुनाव सिर्फ कुंडा की सीट का चुनाव नहीं होगा,बल्कि राजा भ‌इया की सियासी विरासत की अगली परीक्षा भी बन सकता है।अब सबसे बड़ा सवाल यही है-क्या 33 साल से राजा भ‌इया के नाम से पहचाने जाने वाले कुंडा में अगली बार पोस्टरों पर बडे़ या छोटे बेटे का चेहरा दिखाई देगा,इसका जवाब आने वाले महीनों की सियासत तय करेगी।


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