ओडीओपी के जरिए यूपी के लोकल प्रोडक्ट्स बने ग्लोबल,योगी सरकार ने बदली कारीगरों की तकदीर:धनंजय सिंह 

ओडीओपी के जरिए यूपी के लोकल प्रोडक्ट्स बने ग्लोबल,योगी सरकार ने बदली कारीगरों की तकदीर:धनंजय सिंह 

11 Jul 2026 |  6

 



लखनऊ।उत्तर प्रदेश कभी बीमारू राज्य की नजरों से देखा जाता था।गांव और कस्बों में बनने वाले प्रोडक्ट लोकल बाजार तक ही सीमित थे।कारीगर कड़ी मेहनत से बेहतर प्रोडक्ट तैयार करते थे,लेकिन मार्केंटिंग और ब्रांडिंग न होने से उचित दाम नहीं मिल पाता था।योगी सरकार ने ऐसी योजना शुरू की,जिससे कारीगरों की तकदीर बदली और उनके हुनर को एक पहचान मिली।



आज यूपी देश के सबसे बड़े एक्सपोर्ट और मैन्युफैक्चरिंग हब में बदल रहा है।इस बदलाव के पीछे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की दूरदर्शी सोच और 2018 में शुरू की गई वन डिस्ट्रिक्ट,वन प्रोडक्ट योजना है।यह योजना आर्थिक प्रगति का पावरहाउस बन चुकी है।यूपी के छोटे जिलों में हो रहे शानदार काम को लोकल से नेशनल और ग्लोबल बना दिया है।



योगी सरकार में शुरू हुई वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट योजना ने गांव-कस्बों के प्रोडक्ट्स और हुनर को नई पहचान देने का काम किया है।यह योजना यूपी के खास और लोकल प्रोडक्ट्सस क्राफ्ट्स को बढ़ावा देती है।इस योजना ने दम तोड़ते पारंपरिक उद्योगों को पुनर्जीवित किया और यूपी के स्थानीय हुनर को लोकल से ग्लोबल बनाकर लाखों कारीगरों की किस्मत बदल दी है।



उत्तर प्रदेश में 14 साल के सियासी वनवास के बाद 2017 में जब भाजपा सरकार बनी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ बने।सीएम योगी ने यूपी की आर्थिक प्रगति के लिए हर जिले के प्रोडक्ट को पहचान देने के लिए वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट योजना शुरू की।  2018 में एक छोटे से कदम के रूप में शुरू हुई यह पहल अब यूपी की अर्थव्यवस्था में संरचनात्मक बदलाव का सबसे बड़ा माध्यम बन गई है।



योगी सरकार की वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट योजना का मुख्य उद्देश्य स्थानीय कारीगरों और उद्यमियों को ट्रेनिंग,टूलकिट और फाइनेंशियल सपोर्ट देकर आत्मनिर्भर बनाना है,इसकी वजह यह थी कि कभी गांव और कस्बों में बनने वाले कई प्रोडक्ट सिर्फ लोकल बाजार तक सीमित रह जाते थे,लोगों को यह भी पता नहीं चलता था कि यूपी के छोटे जिलों में इतना शानदार काम होता है,लेकिन योगी सरकार की इस योजना ने पूरी तस्वीर ही बदल गई है।



 वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट योजना ने गांव-कस्बों के प्रोडक्ट्स को नई पहचान देने की कोशिश की है।योगी सरकार की इस योजना से यूपी के खास और लोकल प्रोडक्ट्स व क्राफ्ट्स को बढ़ावा मिलता है।इसका आसान आइडिया है कि हर जिले की एक खास पहचान हो और उस पहचान को मार्केट,ब्रांडिंग, ट्रेनिंग और फाइनेंस से सपोर्ट दिया जा रहा है।योगी सरकार की ओर से कारीगरों को निःशुल्क प्रशिक्षण और टूल किट प्रदान किया जाता है।इस योजना के तहत कारीगरों को मुख्यमंत्री दुर्घटना बीमा योजना के माध्यम से 5 लाख रुपए तक का बीमा सुरक्षा कवच भी दिया जा रहा है।



यूपी में जो प्रोडक्ट पहले लोकल मंडी या छोटी दुकान तक सीमित रहते थे,वो अब नेशनल और ग्लोबल मार्केट में अपनी पहचान बना रहे।बीते 9 सालों में वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट योजना के जरिए 1 लाख 46 हज़ार से ज्यादा कारीगरों को बकायदा ट्रेनिंग देने का काम किया गया और 20 हज़ार से अधिक उद्यमियों ने इस योजना का सीधा लाभ उठाया है।



वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट योजना ने यूपी के उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया है।

2017-18 में यूपी का कुल निर्यात जो मात्र 86 हजार करोड़ रुपये का था,वह अब बढ़कर 1.84 लाख करोड़ के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है।इस कुल निर्यात में करीब 50 प्रतिशत हिस्सेदारी अकेले वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट और हस्तशिल्प उत्पादों की है।इस योजना ने अब तक 3.16 लाख लोगों के लिए रोजगार के रास्ते खोले हैं।



यूपी के हर जिले का अपना लोकल उत्पाद अब नेशनल और इंटरनेशनल मार्केट में अपनी मजबूत पहचान बना रहा है। इसका श्रेय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में चल रही वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट योजना को जाता है।यूपी का हर जिला किसी न किसी खास प्रोडक्ट के लिए जाना जाता है।यूपी के किसी जिले में ताला बनता है,तो कहीं पीतल के बर्तन है तो कहीं चिकनकारी है,किसी जिले में काला नमक चावल है,कहीं गुड़ है,कहीं कालीन है और कहीं लकड़ी के खिलौने हैं।



जिला वाइज प्रोडक्ट लिस्ट में आगरा के लेदर और मार्बल प्रोडक्ट्स,अलीगढ़ के ताले और हार्डवेयर,आजमगढ़ की ब्लैक पॉटरी,अयोध्या का गुड़,कन्नौज का इत्र,वाराणसी की सिल्क साड़ी,सहारनपुर और बरेली के फर्नीचर और मुरादाबाद के मेटल क्राफ्ट जैसे कई उदाहरण मिलते हैं।यूपी का हुनर केवल बड़े शहरों में नहीं है,बल्कि असली प्रोडक्ट पावर गांव,कस्बों और छोटे वर्कशॉप में भी है।वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट योजना इसी पावर को सही मार्केट से कनेक्ट करने का रास्ता बना रही है।गुड़ अगर साफ पैकिंग और ब्रांड नाम से बिके तो उसका मार्केट बढ़ सकता है,इसी तरह लकड़ी का खिलौना अगर बेहतर डिजाइन और गिफ्ट पैक में आए तो वह बच्चों और होम डेकोर दोनों मार्केट में जा सकता है।



योगी सरकार की पहल से यूपी के 79 उत्पादों को जीआई टैग प्राप्त हो चुका है,जिससे प्रोडक्ट को इंटरनेशनल स्तर पर ब्रांडिंग को मजबूत पहचान मिली है,इसके लिए पिछले बजट में 145 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया था,जिसे बढ़ाकर 200 करोड़ रुपए कर दिया गया है।इसी का नतीजा है कि यूपी के तमाम प्रोडक्ट्स ग्लोबल मार्केट में आसानी से बिक रहे हैं।



वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट योजना से मुरादाबाद के कारीगरों के जीवन में एक बड़ा बदलाव आया है,इस योजना से मिली मार्केटिंग,ट्रेनिंग और ब्रांडिंग ने मुरादाबाद के पीतल उद्योग को लोकल से ग्लोबल स्तर पर पहचान दिलाई है,जहां पहले उत्पाद सीमित मात्रा में बिकते थे,लेकिन सरकारी सहयोग और प्रदर्शनियों के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मांग बढ़ने से कारोबार कई गुना बढ़ गया है।



अमरोहा में जैकेट,ढोलक के बाद मेटल और वुडन हैंडीक्राफ्ट कारोबार को भी पहचान मिली है।योगी सरकार ने मेटल और वुडन हैंडीक्राफ्ट को वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट में शामिल कर जिले के कारोबारियों की किस्मत बदल दी है।कमाई दो-गुना बढ़ गई है।



लकड़ी के प्रोडक्ट अमरोहा में बनते हैं,पहले कोई नहीं जानता था।वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट योजना में शामिल होते पहचान बढ़ गई।आज लकड़ी के डिनर सेट,लैंप,टेबिल,स्टूल,चेयर, फ्लावर कोट,रई,डमरू,पेन स्टैंड,गमले, कप-प्लेट, घड़ी, गिलास बन रहे हैं।पहले कारीगर अपने शहर या जिले के ग्राहकों पर निर्भर रहते थे,लेकिन अब ऑनलाइन प्लेटफॉर्म, एग्जीबिशन, ट्रेड फेयर और सोशल मीडिया के जरिए दूसरे राज्यों और देशों तक पहुंच रहे हैं।



लोकल प्रोडक्ट की क्वालिटी,पैकेजिंग और ब्रांडिंग बेहतर होती है तो एक्सपोर्ट का रास्ता खुलता है।वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट योजना में प्रोडक्ट्स में कई ऐसे आइटम हैं,जिनकी नेशनल और ग्लोबल मार्केट में मजबूत पहचान बनी है। 



वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट योजना के प्रयास से एक्सपोर्ट में जबरदस्त बढ़ोतरी हुई।मुरादाबाद का मेटल क्राफ्ट,वाराणसी की साड़ी,भदोही की कालीन,कन्नौज का इत्र और अलीगढ़ के ताले जैसे प्रोडक्ट्स यूपी की ग्लोबल पहचान को मजबूत कर रहे हैं।पैकेजिंग,डिजाइन,क्वालिटी और ब्रांडिंग पर फोकस बढ़ने से लोकल प्रोडक्ट ज्यादा प्रोफेशनल दिखता है और इससे ग्राहक का भरोसा भी बढ़ता है।


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