पूर्वांचल सूर्य संवाददाता,रांची।चौधरी शिवराज सिंह ने सीएमपीडीआई के अध्यक्ष सह प्रबंध निदेशक के रूप में पदभार ग्रहण किया।इससे पहले सिंह सीएमपीडीआई के अध्यक्ष सह प्रबंध निदेशक के विशेष कार्यभार अधिकारी के रूप में और कोल इंडिया लिमिटेड और नार्दर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड में विभिन्न पदों पर कार्य कर चुके हैं।कोयला क्षेत्र में 35 वर्षों की अनुकरणीय सेवा के साथ एक प्रतिष्ठित खनन पेशेवर सिंह परियोजना प्रबंधन,ओपनकास्ट खदान योजना और संचालन,संगठनात्मक व्यवसाय योजनाओं और उद्यम जोखिम प्रबंधन में व्यापक विशेषज्ञता रखते हैं।
चौधरी शिवराज सिंह ने 1990 में आईआईटी (बीएचयू), वाराणसी से खनन इंजीनियरिंग में बीटेक की डिग्री प्राप्त की और उसी वर्ष एनसीएल में अपनी सेवा की शुरूआत की। चौधरी शिवराज सिंह को कोयला क्षेत्र में 17 वर्षों का और कारपोरेट प्लानिंग में 18 वर्षों का अनुभव है,जिसमें मेगा खुली खदानों और एनसीएल के कारपोरेट प्लानिंग विभाग में भूमिकाएं शामिल हैं।सीआईएल में उन्होंने मुख्य जोखिम अधिकारी और कारपोरेट प्लानिंग डिविजन के प्रमुख के रूप में कार्य किया। चौधरी शिवराज सिंह की उल्लेखनीय उपलब्धियों में सिंगरौली कोयला क्षेत्र के लिए मास्टर प्लान का नेतृत्व और योजना-निष्पादन संबंधों की स्थापना करना शामिल है,जिसने एनसीएल को 100 मीट्रिक टन प्रति वर्ष से अधिक कोयला उत्पादन तक पहुंचाया और सीआईएल विजन 2047 तथा दीर्घकालिक योजना 2035 शामिल है।
चौधरी शिवराज सिंह एग्जीक्यूटिव एडुकेशन एंड एडवांस मैनेजमेंट एक्सपोजर के लिए अमेरिका,फ्रांस,जर्मनी, स्विटजरलैंड,आस्ट्रिया,स्लोवेनिया की यात्राओं और एग्जीक्यूटिव एडुकेशन एंड बिजनेस डेवलपमेंट के लिए उज्बेकिस्तान और आस्ट्रेलिया की यात्राओं के माध्यम से वैश्विक अनुभव प्राप्त किया है।
चौधरी शिवराज सिंह की कार्यकारी शिक्षा में जार्ज वाशिंगटन विश्वविद्यालय,यूएसए के स्कूल आफ बिजनेस से परियोजना प्रबंधन में इंटरनेशनल एग्जीक्यूटिव डिप्लोमा,ड्यूक सेंटर फार इंटरनेशनल डेवलपमेंट ड्यूक विश्वविद्यालय-यूएसए से परियोजना मूल्यांकन और जोखिम प्रबंधन प्रमाणन, ईएससीपी,पेरिस, फ्रांस से सततता (सस्टेनेबिलिटी) में उन्नत प्रबंधन प्रमाण पत्र,मारिबोर विश्वविद्यालय स्लोवेनिया से उद्योग 4.0 में उन्नत प्रबंधन प्रमाण पत्र और आईआईएम बैंगलोर से परियोजना एवं अवसंरचना वित्तपोषण प्रमाण पत्र शामिल है।
चौधरी शिवराज सिंह की नियुक्ति से सीएमपीडीआई की माइन प्लानिंग,डिजाइन और तकनीकी प्रगति से संबंधित रणनीति पहलों को मजबूती मिलेगी, जिससे पूरा कोयला उद्योग को लाभ होगा।