शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास द्वारा कार्यशाला का आयोजन,600 से अधिक शिक्षाविदों,प्रोफेसरों और संस्थानों के प्रतिनिधियों ने लिया भाग

शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास द्वारा कार्यशाला का आयोजन,600 से अधिक शिक्षाविदों,प्रोफेसरों और संस्थानों के प्रतिनिधियों ने लिया भाग

03 Jan 2026 |  47

 



पूर्वांचल सूर्य प्रतिनिधि,रामगढ़।झारखंड शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास संयोजक महेंद्र कुमार सिंह से प्राप्त जानकारी के अनुसार 26 से 28 दिसंबर 2025 तक सूरत के एसवीएनआईटी और वीर नर्मद दक्षिण गुजरात विश्वविद्यालय में आयोजित इस कार्यशाला में देशभर से 600 से अधिक शिक्षाविदों,प्रोफेसरों और संस्थानों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के प्रभावी क्रियान्वयन,भारतीय ज्ञान परंपरा के पुनर्स्थापन, मूल्य आधारित शिक्षा,कौशल विकास,अनुसंधान और नवाचार पर सार्थक विमर्श करना था।कार्यशाला में एक राष्ट्र,एक नाम, भारत सम्मान समारोह आयोजित किया गया और देश के 23 विश्वविद्यालयों को सम्मानित किया गया। 



समापन सत्र में डॉक्टर अतुल कोठारी ने कहा कि पंच परिवर्तन कोई नया विषय नहीं,बल्कि भारतीय जीवन पद्धति का मूल तत्व है।अतुल कोठारी ने शिक्षण प्रणाली को भारतीय संस्कृति और जीवन दृष्टि से जोड़ने की आवश्यकता पर बल दिया।



कार्यशाला के दौरान न्यास की आगामी योजनाओं की घोषणा की गई,जिनमें दिल्ली,इंदौर,गुजरात,छत्तीसगढ़ और जयपुर में ज्ञान सभा के आयोजन और श्रीनिवास रामानुजन पर अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन शामिल है।साथ ही अंतर्राष्ट्रीय भारतीय भाषा सम्मेलन 9 से 11 जनवरी और चरित्र निर्माण पर राष्ट्रीय कार्यशाला 17 से 19 अप्रैल हरिद्वार का भी उल्लेख हुआ।



इस कार्यक्रम में 35 से अधिक विश्वविद्यालयों के कुलपति और निदेशक उपस्थित रहे।झारखंड से 19 प्रतिनिधियों ने सक्रिय भागीदारी की,जिनमें डॉक्टर अखौरी गोपाल, डॉक्टर ब्रज कुमार विश्वकर्मा,डॉक्टर ललिता राणा,डॉक्टर संतोष कुमार सिंह, डॉक्टर अरुण कुमार मिश्रा,महंत विजयानंद दास जी, डॉक्टर खेमलाल महतो आदि प्रमुख रहे। 



हजारीबाग के बड़ा अखाड़ा में 1 जनवरी को सभी प्रतिभागियों का स्वागत और सम्मान किया गया।कार्यशाला का समापन इस संकल्प के साथ हुआ कि शिक्षा राष्ट्रीय पुनर्निर्माण का केंद्रबिंदु बने और राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 को पूरी शक्ति से लागू किया जाए।


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