यूपी आकर मुस्लिम लड़कियां बन जाती हैं हिंदू,एक लाख रुपये में होती थी डील
बंगाल की मुस्लिम लड़कियों को हिंदू नाम और फर्जी आधार कार्ड के जरिए शादियों में उतारने वाले गैंग का हुआ खुलासा
संभल।पश्चिम बंगाल की नूरजहां खातून और आयशा जब उत्तर प्रदेश के संभल पहुंचीं तो उनकी पहचान बदल चुकी थी। संभल में वे नूरजहां और आयशा नहीं,बल्कि काजल और पूजा बन चुकी थीं।कोई शक न करे इसके लिए बाकायदा नया आधार कार्ड तैयार कराया गया,जिसमें न नाम पुराना था और न ही धर्म।इस पूरी पहचान बदलो साजिश के पीछे एक संगठित गिरोह काम कर रहा था।यह गिरोह पचास हजार से लेकर एक लाख रुपये तक की डील में इन्हें तैयार किया,इसके बाद शुरू हुआ भरोसे,रिश्तों और शादी की आड़ में लूट का खेल,लेकिन जिस प्लानिंग को ये पूरी तरह सुरक्षित मान रही थीं,वही संभल पुलिस की कार्रवाई के आगे ढह गई। अब इस पूरे गिरोह का ऐसा खुलासा हुआ है, जिससे लोगों के पैरों तले जमीन खिसक गई।
बंगाल से संभल तक फैला था नेटवर्क
संभल पुलिस एक के बाद एक चार नई दुल्हनों के घर से भागने के बाद से अलर्ट थी।पुलिस की शुरुआती जांच में ही साफ हो गया था कि यह मामला यहीं तक सीमित नहीं है,यह एक सुनियोजित नेटवर्क था,जिसकी जड़ें बंगाल से लेकर पश्चिमी यूपी तक फैली हुई थीं।नूरजहां खातून उर्फ काजल और आयशा उर्फ पूजा इस नेटवर्क की सिर्फ कड़ियां थीं।पूरी चेन इनके पीछे काम कर रही थी।पूछताछ में सामने आया कि बंगाल के अलग-अलग इलाकों से आर्थिक रूप से कमजोर मुस्लिम लड़कियों को चुना जाता था,उन्हें भरोसा दिलाया जाता था कि यूपी में अच्छी शादी कराई जाएगी,परिवार संपन्न है और कुछ ही दिनों में सेटलमेंट हो जाएगा,इसके बाद लड़कियों को मानसिक रूप से तैयार किया जाता था कि उन्हें अपना नाम, पहचान और धर्म बदलकर रहना है।
फर्जी आधार कार्ड गिरोह का बना सबसे मजबूत हथियार
पुलिस जांच में सामने आया कि बदायूं जिले में एक खास नेटवर्क सक्रिय था,जहां असली आधार कार्ड में नाम और धर्म बदलकर नया आधार कार्ड तैयार कराया जाता था।इसी आधार कार्ड के आधार पर शादी के दस्तावेज,गांव में पहचान और सामाजिक स्वीकार्यता हासिल की जाती थी।नूरजहां खातून खुद भी इसी तरीके से काजल बनी थी,उसने राजीव नाम के युवक से शादी भी हिंदू नाम और पहचान के सहारे की थी।यही वजह थी कि गांव और आसपास के लोग लंबे समय तक किसी तरह का शक नहीं कर पाए।
बनाया जाता था अविवाहित युवकों को निशाना
यह गिरोह खासतौर पर ऐसे युवकों को टारगेट करता था,जिनकी उम्र ज्यादा हो चुकी हो,जिनकी शादी किसी वजह से नहीं हो पा रही हो,जो आर्थिक या सामाजिक रूप से कमजोर हों।ऐसे परिवारों में शादी की उम्मीद दिखाकर मैरिज ब्रोकर भरोसा जीत लेती थी।कहा जाता था कि लड़की सीधे शादी के लिए तैयार है,कोई ज्यादा खर्च नहीं होगा और सब कुछ साफ-सुथरा रहेगा।
50 हजार से 1 लाख तक की डील
शादी तय होते ही पैसों की बात होती थी।परिवार की हैसियत देखकर 50 हजार से लेकर 1 लाख रुपये तक की रकम तय की जाती थी।यह रकम लड़की लाने,कागज बनवाने और शादी करवाने के नाम पर ली जाती थी।गांव के कई लोगों ने पुलिस को बताया कि उन्हें यही लगा कि कम खर्च में शादी हो रही है, इसलिए किसी तरह का ज्यादा सवाल-जवाब नहीं किया गया।यही चुप्पी इस गिरोह के लिए सबसे बड़ा हथियार बनी।
शुरू होता था शादी के बाद असली खेल
पूछताछ में सामने आया कि लड़कियों को पहले से ट्रेनिंग दी जाती थी।शादी के बाद 4 से 5 दिन सामान्य व्यवहार करना, ससुराल वालों का भरोसा जीतना,घर में रखे जेवर,नकदी और कीमती सामान की जानकारी लेना और मौका मिलते ही फरार हो जाना।कुछ मामलों में दुल्हनों को भगाने के लिए बाइक और बाहरी मदद भी तय रहती थी।
डेढ़ महीने में हुई चार वारदातें
संभल के पतरौआ गांव और आसपास के इलाकों में डेढ़ महीने चार ऐसी शादियां सामने आईं,शादी के बाद दुल्हनें फरार हो गईं। 22 दिसंबर 2025 को भोले की शादी आरती नाम की लड़की से कराई गई, 55 हजार रुपये लिए गए,9 जनवरी 2026: को राजू की शादी पूजा (असल नाम आयशा) से 53 हजार रुपये में, 9 जनवरी को ही प्रवेश की शादी दूसरी पूजा से 75 हजार रुपये में व इसी दिन मुरादाबाद के मोनू मिश्रा की शादी इशिका नाम की लड़की से, 70 हजार रुपये में कराई गई।कुछ ही दिनों के भीतर आरती और इशिका जेवर और नकदी लेकर फरार हो गईं।
सीसीटीवी फुटेज से खोली पोल
एक मामले में तो दुल्हन को रात के अंधेरे में बाइक पर बैठाकर भगाए जाने का सीसीटीवी फुटेज भी सामने आया। यही फुटेज पुलिस जांच में अहम सबूत बना और गिरोह तक पहुंचने की कड़ी जोड़ता चला गया। 20 जनवरी 2026 को जब राजू की पत्नी पूजा घर से सामान समेट रही थी, तो ग्रामीणों को शक हुआ।सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और उसे पकड़ लिया गया। यही गिरफ्तारी इस पूरे नेटवर्क के लिए सबसे बड़ा झटका साबित हुई।
महिला पुलिस की पूछताछ में खुला सच
महिला पुलिस की मौजूदगी में हुई पूछताछ में पहले तो पूजा अपने बयान पर अड़ी रही,लेकिन आधार कार्ड सामने आते ही उसकी कहानी बिखर गई।नाम पूजा नहीं आयशा खातून,धर्म हिंदू नहीं,मुस्लिम।यहीं से पुलिस ने पूरे मामले को संगठित अपराध मानते हुए जांच का दायरा बढ़ा दिया।
मैरिज ब्रोकर और उसका पति गिरफ्तार
पूछताछ में काजल नाम सामने आने के बाद पुलिस ने बदायूं और बरेली में दबिश दी।वहां से काजल और राजीव को गिरफ्तार कर चंदौसी लाया गया।आधार कार्ड चेक होने पर काजल का असली नाम भी नूरजहां खातून निकला।पुलिस ने आरोपियों के पास से सोने और चांदी के जेवर,नकदी, मोबाइल फोन बरामद किए हैं।मोबाइल डेटा खंगाला जा रहा है,जिससे और भी नाम सामने आने की संभावना जताई जा रही है।
एसपी कृष्ण कुमार विश्नोई ने सुनाई पूरी कहानी
एसपी कृष्ण कुमार विश्नोई ने बताया कि यह गैंग योजनाबद्ध तरीके से धर्म और पहचान छुपाकर शादियां कराता था।उद्देश्य सिर्फ लूट था।चार मामलों की पुष्टि हो चुकी है और अन्य जिलों से भी जानकारी जुटाई जा रही है।सभी आरोपियों को जेल भेजा जा रहा है।पुलिस के अनुसार अभी तीन लुटेरी दुल्हनें फरार हैं,जिनकी तलाश जारी है।साथ ही फर्जी आधार कार्ड बनाने वाले नेटवर्क पर भी शिकंजा कसने की तैयारी है।