पूर्वांचल सूर्य प्रतिनिधि,चतरा।जिले के ऐतिहासिक धर्मस्थली इटखोरी में भगवान शीतलनाथ की जन्मभूमि भदलपुर में नवनिर्मित जैन मंदिर में 1 से 6 फरवरी तक पंचकल्याणक प्रतिष्ठा और पहला महा मस्तकाभिषेक महोत्सव का आयोजन होगा।इस भव्य पंचकल्याणक आयोजन में देश भर से हजारों जैन श्रद्धालु शामिल होंगे।नव निर्मित मंदिर को अंतिम रूप दिया जा रहा है और श्रद्धालुओं के लिए विशेष व्यवस्थाएं की जा रही हैं। यह महोत्सव इटखोरी को राष्ट्रीय पहचान दिलाएगा और धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा।
इस मौके पर इटखोरी में भगवान शीतलनाथ की नव स्थापित प्रतिमा की प्राण प्रतिष्ठा की जाएगी।यह कार्यक्रम 1 फरवरी से शुरू होगा और 6 फरवरी तक चलेगा।पंचकल्याणक महा मस्तकाभिषेक कार्यक्रम बड़ी तादाद में श्रद्धालु और जैन मतावलंबी शिरकत करेंगे।
इस महोत्सव को लेकर उत्साह,भक्ति और श्रद्धा का माहौल बना हुआ है।महोत्सव को लेकर नव निर्मित जैन मंदिर को अब अंतिम रूप दिया जा रहा है। प्रतिमा के प्राण प्रतिष्ठा से पूर्व मंदिर परिसर में ज़ोर-शोर से निर्माण और साज-सज्जा का कार्य चल रहा है।कारीगर लगातार दिन-रात मंदिर के शिखर, गर्भगृह, मंडप और प्रवेश द्वार को भव्य बनाने में जुटे हैं। साथ ही रंग-रोगन,फर्श निर्माण,विद्युत सजावट और श्रद्धालुओं की सुविधा से जुड़े कार्य युद्धस्तर पर पूरे किए जा रहे हैं।वहीं श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए ठहराव,भोजन, सुरक्षा और यातायात की भी विशेष व्यवस्था की जा रही है।
महोत्सव के दौरान भगवान शीतलनाथ स्वामी की प्रतिमा की विधिवत प्रतिष्ठा के साथ पंचकल्याणक अनुष्ठान, महामस्तकाभिषेक,शांतिधारा,पूजा-अर्चना,धार्मिक प्रवचन और भक्ति संगीत जैसे अनेक धार्मिक कार्यक्रम आयोजित होंगे।सभी अनुष्ठान देश के प्रतिष्ठित जैन आचार्यों,मुनिराजों और विद्वान पंडितों के पावन सान्निध्य में विधि-विधान से संपन्न कराए जाएंगे।
भगवान शीतलनाथ जन्मभूमि पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव आयोजन समिति के महामंत्री सुरेश झांझरी ने बताया कि 6 दिवसीय महोत्सव में झारखंड सहित देश के विभिन्न राज्यों से हजारों जैन श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है। श्रद्धालुओं के आगमन से क्षेत्र में धार्मिक के साथ-साथ सामाजिक और सांस्कृतिक वातावरण भी और अधिक सशक्त होगा। उन्होंने बताया कि यह महोत्सव न केवल जैन समाज के लिए आस्था और भक्ति का केंद्र बनेगा, बल्कि इटखोरी की धार्मिक पहचान को राष्ट्रीय स्तर पर एक नई पहचान भी दिलाएगा। इससे क्षेत्र के धार्मिक पर्यटन को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
आयोजन समिति ने सभी श्रद्धालुओं,धर्मप्रेमियों और लोगों से अपील की है कि वे इस पावन महोत्सव में अधिक से अधिक संख्या में पहुंचकर भगवान शीतलनाथ स्वामी के दर्शन-लाभ प्राप्त करें और आयोजन को सफल बनाने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएं।