अलीगढ़ में मीट इंडस्ट्री बनी अवैध रोहिंग्या की शरणगाह

अलीगढ़ में मीट इंडस्ट्री बनी अवैध रोहिंग्या की शरणगाह

17 Jul 2026 |  10

 



अलीगढ़। उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ की मीट इंडस्ट्री अवैध रोहिंग्या की शरणगाह बन गई है।अलीगढ़ में मीट एक्सपोर्ट इंडस्ट्री में 2009-10 के आसपास आए उछाल के बाद अवैध रूप से रह रहे रोहिंग्या परिवारों के आने का सिलसिला शुरू हुआ था।पहले ये मकदूम नगर में किराये पर बसे,फिर मीट फैक्ट्रियों में ठेकेदारी और मजदूरी करने लगे।खुफिया एजेंसियों के मुताबिक ये नेटवर्क सोने की तस्करी में भी शामिल रहा था।पांच साल पहले दो लोग अलीगढ़ से पकड़े गए थे।



खुफिया तंत्र के मुताबिक...



खुफिया तंत्र के मुताबिक मीट एक्सपोर्ट में तेजी के बाद अलीगढ़ में सस्ते मजदूरों की मांग बढ़ी।इसका फायदा उठाकर बांग्लादेश सीमा से होते हुए रोहिंग्या परिवार अलीगढ़ शहर पहुंचे।कोतवाली क्षेत्र के मकदूम नगर में इन्होंने अपना ठिकाना बना लिया।स्थानीय लोगों ने इन्हें किराये पर रखा और धीरे-धीरे ये बसते चले गए। पांच साल पहले तक जिले में 246 रोहिंग्या पंजीकृत थे।सभी के पास शरणार्थी कार्ड था,ये अधिकतर मीट फैक्ट्रियों में काम करते थे।बीच-बीच में सख्ती और गिरफ्तारी के बाद कई रोहिंग्या यहां से लौट गए। फिलहाल सरकारी रिकॉर्ड में सिर्फ 8 रोहिंग्या पंजीकृत हैं।



इकाई मथुरा बाईपास पर संचालित



प्राथमिक जांच में दो करोड़ रुपये से अधिक के टर्न ओवर पर करापवंचन का मामला प्रकाश में सामने आया है।यह इकाई कोल तहसील में मथुरा बाईपास पर संचालित है।उक्त श्रेणी की इकाइयों पर पांच फीसदी की दर से जीएसटी अदा की जाती है।फर्म को नोटिस जारी कर दिया गया है। सुनवाई व दस्तावेजों के अध्ययन के बाद मामले में टैक्स अधिरोपित किया जाएगा। फिलहाल एसआईबी की कार्रवाई से स्लाटर हाउस संचालक सकते में हैं। इसके बाद कई अन्य इकाइयों का भी नंबर आ सकता है।



ब्रांचों के भी दस्तावेज मंगाए जाएंगे



जांच अधिकारी की ओर से अब शामली और गाजियाबाद में स्थित ब्रांचों के दस्तावेजों की भी जांच कराई जाएगी। वहां के दस्तावेज और इलेक्ट्रानिक डिवाइस जांच में अहम साबित हो सकती है। राजस्व बढ़ाने और करापवंचन पर लगाम लगाने के लिए एसआईबी ने कार्रवाई तेज कर दी है। जल्द ही कुछ अन्य बड़ी फर्मों के खिलाफ कार्रवाई होगी।एसपी सिटी आदित्य बंसल ने कहा कि अभी तक किसी एजेंसी ने कोई संपर्क नहीं किया है। फिर भी सतर्क दृष्टि रखी जा रही है। हालांकि शहर के सभी थाना क्षेत्रों में किरायेदारों का सत्यापन कराया जा रहा है।



सोने की तस्करी और फर्जी दस्तावेज का मामला



जून 2021 में एटीएस ने दो रोहिंग्या भाई मोहम्मद रफीक और मोहम्मद आमीन को गिरफ्तार किया था।दोनों मूल रूप से म्यांमार के रहने वाले थे और 2012 में बिना पासपोर्ट बांग्लादेश के रास्ते कोलकाता होते हुए अलीगढ़ आए थे। यहां आकर दोनों ने रिफ्यूजी कार्ड बनवाया और मीट फैक्ट्री में ठेकेदारी शुरू कर दी। जांच में पता चला कि इनके साढ़ू मोहम्मद हसन ने ही विवाद के बाद एनटीएस को इनकी जानकारी दी थी।



विदेशी फंडिंग और नया नेटवर्क



ईडी की हालिया छापेमारी में सामने आया है कि विदेशी फंडिंग के जरिए एक सिंडिकेट रोहिंग्या और बांग्लादेशियों की घुसपैठ कराता है।इस फंड से घुसपैठियों को ई-रिक्शा खरीदवाना, छोटे कारोबार में मदद करना और फैक्ट्रियों में नौकरी दिलाना शामिल है।जांच में अलीगढ़,बरेली,सहारनपुर समेत कई जिलों के मीट कारखानों में इन्हें लगवाने की बात भी सामने आई है।



ईंट-भट्ठे से पकड़े गए थे पांच बांग्लादेशी



अवैध रूप से सीमा पार करके देश में दाखिल हुए 10 बांग्लादेशी अलीगढ़ जेल में सजा काट रहे हैं। सभी को पुलिस ने अलग-अलग स्थानों से मजदूरी करते हुए पकड़ा था। इसमें पिछले साल अगस्त में गांधीपार्क क्षेत्र के गांव कमालपुर के बाहर ईंट भट्ठे में बनीं झुग्गियों में छापा मारकर पुलिस ने पांच बांग्लादेशी को पकड़ा था। ये सभी बांग्लादेश के जिला कुडीग्राम के थाना फुलवाड़ी क्षेत्र के अजुआटडी के रहने वाले थे और एक ही परिवार के थे।



फिर दिखीं मदद मांगने वाली युवतियां



पिछले साल खैर क्षेत्र में कुछ युवतियों का वीडियो वायरल हुआ था।ये बाढ़ पीड़ितों के नाम पर सड़क पर गाड़ियां रोककर चंदा मांग रही थीं। इनके पास कोई वैध दस्तावेज नहीं था। आशंका जताई गई थी कि ये बांग्लादेशी या रोहिंग्या हो सकती हैं। वीडियो वायरल होने के बाद ये गायब हो गई थीं, लेकिन इस महीने देहात के कई इलाकों में ये फिर देखी गई हैं। ये युवतियां गांधीपार्क क्षेत्र में रहती हैं।



सभी पंजीकृत रोहिंग्या का डेटा बायोमीट्रिक



खुफिया एजेंसियों के मुताबिक पश्चिमी उत्तर प्रदेश में कुल 1200 रोहिंग्या हैं। इनमें से 40 हजार रोहिंग्या पूरे देश में बताए जाते हैं, जिनमें 16 हजार के पास शरणार्थी कार्ड है। बाकी का कोई रिकॉर्ड नहीं है। अलीगढ़ में सभी पंजीकृत रोहिंग्या का डेटा बायोमीट्रिक है।


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