पाकिस्तान में भी ठाकुर बांकेबिहारी की जमीन,शुरू हुई जांच,कैसे मिलेगा मालिकाना हक

पाकिस्तान में भी ठाकुर बांकेबिहारी की जमीन,शुरू हुई जांच,कैसे मिलेगा मालिकाना हक

21 Jan 2026 |  23

 



मथुरा।ठाकुर बांकेबिहारी के नाम पर केवल देश के विभिन्न राज्यों हीं बल्कि विदेश में भी संपत्तियां हैं।पाकिस्तान में भी ठाकुर बांकेबिहारी की संपत्तियां हैं।बांकेबिहारी कमेटी के मुताबिक भारत में कई जगह ऐसी हैं,जो बांकेबिहारी मंदिर के नाम पर रजिस्टर्ड हैं। इन सभी संपत्तियों की जानकारी निकालने के लिए जांच की जा रही है।



19 जनवरी को ठाकुर बांकेबिहारी हाई पावर मैनेजमेंट कमेटी की एक बैठक हुई,ये 11वीं बैठक थी।बैठक में विभिन्न मुद्दों पर चर्चा हुई,लेकिन सबसे बड़ी बात यह रही कि बांके बिहारी मंदिर के नाम पर राजस्थान के कोटा में रजिस्टर्ड 15 हेक्टेयर जमीन प्राप्त हुई,ये जमीन काफी बेसकीमती है।



जमीन के बारे में जानकारी देते हुए हाई पावर कमेटी के अध्यक्ष हाईकोर्ट से रिटायर जज अशोक कुमार ने बताया कि राजस्थान के कोटा में बांके बिहारी महाराज की जमीन मिली है,जिसे वहां के अधिकारियों के साथ मिलकर प्राप्त किया गया है।मथुरा डीएम को आदेश दिया गया है कि बांकेबिहारी महाराज की जितनी भी जमीन अपने राज्य के साथ-साथ अन्य राज्यों में दर्ज है,उन सभी जमीनों का ब्यौरा निकाला जाए और सभी राज्यों के मुख्य सचिव को पत्र लिखकर इसकी जानकारी प्राप्त की जाए,जिससे कि वहां के प्रशासन के साथ मिलकर ठाकुर बांकेबिहारी महाराज की जमीन को हासिल किया जा सके।



कुछ इतिहासकार बताते हैं कि ठाकुर बांकेबिहारी की जमीन भारत के साथ-साथ पाकिस्तान में भी है,जो कि काफी पुराने समय की बताई जाती है।बताया जाता है कि प्राचीन ग्रंथों के अनुसार पाकिस्तान के उस ग्राम में ठाकुर बांके बिहारी के पूर्वजों की विशाल और पुरानी हवेली आज भी मौजूद है।इसके साथ-साथ सियालकोट क्षेत्र में भी जमीन मौजूद होने की बात कही जाती है,जिसका उल्लेख प्राचीन ग्रंथ केलिमालजू और स्वामी हरिदास अभिनंदन ग्रंथ में मिलता है,लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब हाई पावर कमेटी भारत के अंदर बांके बिहारी के नाम पर जमीन की तलाश कर रही है,तो क्या पाकिस्तान में मौजूद जमीन को लेकर भी कोई कार्रवाई की जाएगी।



बता दें कि ठाकुर बांकेबिहारी के भक्त अपने आराध्य की सेवा में तन,मन और धन से समर्पित रहे हैं।पहले भरतपुर के महाराजा ने अपना बगीचा दान देकर ठाकुर बांकेबिहारी मंदिर की स्थापना कराई तो किशोरपुरा पर लगभग पांच सौ वर्गगज का एक भूखंड एक श्रद्धालु ने करीब पांच दशक पहले मंदिर को दान दिया।ठाकुरजी की सेवा में उनके प्राकट्यकाल से लेकर अब तक बहुत सी चल-अचल संपत्तियां भेंट और दान में मिलीं।दानदाता भक्तों में हिंदू राजा-महाराजाओं के साथ मुस्लिम नवाबों के नाम भी शामिल हैं।साल 1592 में जयपुर नरेश सवाई महाराजा मानसिंह ने तीन एकड़ जमीन, 1594 में मुगल सम्राट अकबर ने 25 बीघा जमीन वृंदावन और राधाकुंड में,वृंदावन में ही साल 1595 में हरिराम व्यास ने किशोरपुरा में भूखंड, 1596 में मित्रसेन कायस्थ और उनके बेटे बिहारिनदास नामक भक्त ने बिहारिनदेव टीलावाली भूमि के अलावा साल 1748 में जयपुर नरेश सवाई महाराजा ईश्वरी सिंह ने 1.15 एकड़ जमीन दान दी।साल 1769 में भरतपुर और करौली सरकार द्वारा भूमिदान, 1780 में विंध्याचल राजपरिवार ने भूमि और बहुमूल्य आभूषण, 1785 में ग्वालियर रियासत ने भूमि-भवन और आभूषण दान दिए।साल 1960 में राजस्थान के भक्त परिवार ने कोटा में 90 बीघा जमीन दी।दिल्ली के फराशखाने में मंदिर,भवन,वर्तमान पाकिस्तान के मुल्तान,शक्कर सिंध और सियालकोट में मंदिर-हवेली काफी प्राचीन हैं।


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