वाराणसी।अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से भारतीय उत्पादों पर लगाए गए 50 फीसदी टैरिफ घटाकर अब 18 फीसदी करने के फैसले से पूर्वांचल के उद्यमियों और निर्यातकों का चेहरा गुलाब की तरह खिल गया है।पिछले छह महीनों से अमेरिका के साथ ठप पड़े व्यापारिक रिश्तों में इस कटौती के बाद एक नई ऊर्जा का संचार हुआ है।
वाराणसी,मिर्जापुर और भदोही के निर्यातकों का मानना है कि इस ट्रेड डील से न केवल व्यापार की लागत कम होगी,बल्कि वैश्विक बाजार में भारतीय उत्पादों की प्रतिस्पर्धी क्षमता भी बढ़ेगी।बता दें कि भदोही और मिर्जापुर अपनी कालीन बुनाई और हस्तशिल्प के लिए पूरे विश्व में विख्यात है।
कालीन कारोबारी विजय कपूर ने बताया कि वाराणसी, मिर्जापुर और भदोही जिले से सालाना 12 हजार करोड़ रुपये का निर्यात होता है।इसमें अकेले 8000 करोड़ रुपये का व्यापार अमेरिका से जुड़ा है। उन्होंने बताया कि पिछले साल अगस्त में जब ट्रंप ने पहले 25 प्रतिशत और फिर उसे बढ़ाकर 50 प्रतिशत टैरिफ कर दिया था,तब अमेरिकी खरीदारों ने भारतीय सामानों की ऊंची कीमतों के कारण हाथ खींच लिए थे।इसके कारण वाराणसी की सिल्क साड़ियां,भदोही के कालीन और टेक्सटाइल उत्पादों के करोड़ों रुपये के ऑर्डर अधर में लटक गए थे।
उद्यमियों का कहना है कि 50 प्रतिशत के दमनकारी शुल्क के कारण कई कारखाने बंद होने की कगार पर थे और लाखों कारीगर बेरोजगार हो गए थे। अब डील फाइनल होने के बाद निर्यात की राह आसान हुई है।
कृषि यंत्र निर्यातक राजेश सिंह ने बताया कि वहां के खरीदारों से फिर से बातचीत की जा रही है।संभावना है कि ठप पड़े उद्योगों को फिर से पंख लगेंगे।पूर्वांचल निर्यातक संघ के अध्यक्ष रघु मेहरा बताया कि अमेरिकी टैरिफ पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। अब भी 18 प्रतिशत तक टैरिफ का प्रभाव उद्योगों पर पड़ रहा है। हालांकि अब के फैसले से भी काफी हद तक राहत मिलेगी।
उद्यमियों का कहना है कि 50 प्रतिशत के दमनकारी शुल्क के कारण कई कारखाने बंद होने की कगार पर थे और लाखों कारीगर बेरोजगार हो गए थे।अब डील फाइनल होने के बाद निर्यात की राह आसान हुई है।
कृषि यंत्र निर्यातक राजेश सिंह ने बताया कि पूर्वांचल से अमेरिका में निर्यात की चैन टूट गई है। वहां के खरीदारों से फिर से बातचीत की जा रही है।संभावना है कि ठप पड़े उद्योगों को फिर से पंख लगेंगे।अमेरिका से नए ऑर्डर मिलने की प्रबल संभावना है,जिससे बेरोजगार हो चुके कारीगरों को दोबारा काम पर बुलाया जा सकेगा।
इन उद्योगों पर सकारात्मक प्रभाव।इसमें भदोही और मिर्जापुर की अर्थव्यवस्था की रीढ़ कहे जाने वाले इस उद्योग का 60 फीसदी निर्यात अमेरिका को होता है।बनारसी साड़ियां,चादरें, कुशन कवर और जरी-जरदोजी के काम को नया बाजार मिलेगा।निर्यातकों का कहना है कि टूटी हुई सप्लाई चेन को फिर से जोड़ने के लिए विदेशी खरीदारों से बातचीत शुरू हो गई है।