इलाज के इंतजार में बुझ गई जिंदगी,मदद की पुकार अनसुनी,हृदय रोगी भीखन राम ने तोड़ा दम
खबर छपने के बाद भी नहीं मिली सहायता,आर्थिक तंगी से जूझते रहे,गांव में शोक के साथ व्यवस्था पर उठे सवाल
पूर्वांचल सूर्य प्रतिनिधि
पत्थलगड़ा,चतरा।जिले के पत्थलगड़ा प्रखंड के सिंघानी गांव में एक गरीब परिवार की बेबसी और व्यवस्था की संवेदनहीनता की दर्दनाक कहानी सामने आई है।हृदय रोग से पीड़ित 58 वर्षीय भीखन राम ने गुरुवार देर रात इलाज के अभाव में दम तोड़ दिया।
गौरतलब है कि कुछ दिन पहले ही भीखन राम और उनकी पत्नी मंजू देवी ने अपनी आर्थिक स्थिति और बीमारी की गंभीरता को लेकर स्थानीय पत्रकारों के माध्यम से जनप्रतिनिधियों,समाजसेवियों और प्रशासन से मदद की अपील की थी।उम्मीद थी कि समय रहते सहायता मिलेगी और उनका इलाज संभव हो पाएगा,लेकिन सहायता की कोई ठोस पहल नहीं हो सकी।परिवार और ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते मदद मिल जाती,तो शायद एक गरीब की जान बच सकती थी।
देर रात अचानक बिगड़ी तबीयत
परिजनों के अनुसार गुरुवार की देर रात करीब दो बजे भीखन राम की तबीयत अचानक खराब हो गई,उन्हें उल्टियां होने लगीं और कुछ देर बाद खून की उल्टी भी हुई। इसके बाद वह बरांडे में जाकर जमीन पर चटाई बिछाकर लेट गए।थोड़ी देर बाद जब उनकी पत्नी मंजू देवी उन्हें उठाने गईं,तो कोई हलचल नहीं हुई। इसके बाद घर में कोहराम मच गया और देखते ही देखते पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई।
भीखन राम लंबे समय से हृदय रोग से थे पीड़ित
बताया जाता है कि भीखन राम लंबे समय से हृदय रोग से पीड़ित थे।स्थानीय स्तर से लेकर हजारीबाग तक कई जगह उनका इलाज कराया गया था।डॉक्टरों ने बड़े अस्पताल में नियमित इलाज और दवा जारी रखने की सलाह दी थी, लेकिन आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण इलाज जारी रखना संभव नहीं हो पा रहा था।परिवार की आय का एकमात्र सहारा उनका बेटा है,जो एक स्थानीय दुकान में काम करता है,उसकी सीमित कमाई से घर का खर्च ही मुश्किल से चल पाता था।
कई बार लगाई मदद की गुहार
मंजू देवी ने बताया कि उन्होंने पंचायत स्तर पर भी मदद की मांग की थी।मुखिया के माध्यम से कुछ कागजी प्रक्रिया भी पूरी कराई गई थी,लेकिन आगे कोई ठोस सहायता नहीं मिल पाई। इस बीच भीखन राम की तबीयत लगातार बिगड़ती चली गई।
गांव में शोक और चर्चा
भीखन राम की मौत की खबर फैलते ही सिंघानी गांव और आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में लोग उनके घर पहुंचे। हर किसी के चेहरे पर दुख और मन में एक ही सवाल था कि आखिर एक गरीब की मदद के लिए कोई आगे क्यों नहीं आया।ग्रामीणों ने कहा कि पीड़ित परिवार ने अपनी परेशानी सार्वजनिक रूप से बताई थी फिर भी कोई ठोस पहल नहीं हुई। इससे गांव में दुख के साथ-साथ चिंता और चर्चा का माहौल बना हुआ है।
पत्नी का दर्द
पति की मौत से बेसुध मंजू देवी ने रोते हुए कहा कि उन्हें उम्मीद थी कि किसी न किसी स्तर से मदद जरूर मिलेगी और उनके पति का इलाज हो सकेगा।उन्होंने कहा कि आर्थिक तंगी के कारण इलाज नहीं करा पाने का दर्द उन्हें जीवनभर सालता रहेगा।
पीड़ित परिवार की मदद की मांग
ग्रामीणों ने प्रशासन,जनप्रतिनिधियों और समाजसेवियों से अपील की है कि पीड़ित परिवार की आर्थिक मदद के लिए आगे आएं।ग्रामीणों का कहना है कि एक व्यक्ति की जान तो वापस नहीं आ सकती, लेकिन यदि पीड़ित परिवार को सहयोग मिल जाए तो उनके जीवन को संभलने में सहारा मिल सकता है।इस घटना के बाद गांव में यह सवाल भी उठ रहा है कि जरूरतमंदों तक सहायता और संवेदनशीलता कैसे पहुंचे, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।