बीआईटी मेसरा में हरित ऊर्जा एवं डिजिटल प्रौद्योगिकियों पर पांच दिवसीय संकाय विकास कार्यक्रम,ज्यूरिख,सिंगापुर और कैलिफ़ोर्निया से प्रतिभागी होंगे शामिल

बीआईटी मेसरा में हरित ऊर्जा एवं डिजिटल प्रौद्योगिकियों पर पांच दिवसीय संकाय विकास कार्यक्रम,ज्यूरिख,सिंगापुर और कैलिफ़ोर्निया से प्रतिभागी होंगे शामिल

16 May 2026 |  11

 



पूर्वांचल सूर्य प्रतिनिधि



रांची।बिरला प्रौद्योगिकी संस्थान मेसरा के इलेक्ट्रिकल एवं इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग विभाग द्वारा 18 से 22 मई तक सस्टेनेबल हरित ऊर्जा सिस्टम्स के लिए उभरती नियंत्रण एवं डिजिटल प्रौद्योगिकियां विषय पर एक संकाय विकास कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा। यह कार्यक्रम तकनीकी व्याख्यानों के साथ सिमुलेशन आधारित और अनुप्रयोग-उन्मुख सत्रों का समन्वय है,जिसमें राष्ट्रीय संस्थानों, अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालयों और उद्योग जगत से कुल 19 वक्ता भाग लेंगे।



भारत के रिन्यूएबल ऊर्जा कार्यक्रम,जिसका लक्ष्य साल 2030 तक 500 गीगावाट स्थापित क्षमता और साल 2070 तक नेट-ज़ीरो उत्सर्जन प्राप्त करना है।विद्युत प्रणालियों और स्वच्छ ऊर्जा प्रौद्योगिकियों में विशेषज्ञता रखने वाले संकाय सदस्यों की मांग को बढ़ा दिया है।यह कार्यक्रम चार प्रमुख क्षेत्रों पर केंद्रित है,विद्युत वाहन प्रणालियां,स्मार्ट ग्रिड प्रौद्योगिकी,ऊर्जा प्रबंधन में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और रिन्यूएबल ऊर्जा स्रोत।सत्रों में कक्षा शिक्षण के साथ व्यावहारिक और प्रयोगात्मक घटक भी शामिल होंगे। 



इस आयोजन को गैस अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड, झारखंड रिन्यूएबल ऊर्जा विकास अभिकरण क्वार्ब्ज इन्फो सिस्टम और क्रिएटिव रोबोटिक्स जैसी संस्थाओं का सहयोग प्राप्त है,जो उभरती ऊर्जा और डिजिटल प्रौद्योगिकी प्रशिक्षण क्षेत्र में उद्योगों की भागीदारी को दर्शाता है।



यह कार्यक्रम संस्थान के कुलपति प्रोफेसर इंद्रनील मन्ना के संरक्षण में आयोजित किया जा रहा है।कार्यक्रम के अध्यक्ष के रूप में इलेक्ट्रिकल एवं इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग विभाग के विभागाध्यक्ष डॉक्टर सुधांशु कुमार मिश्रा कार्यरत हैं, जबकि संकाय विकास कार्यक्रम समन्वयक डॉक्टर गौरी शंकर गुप्ता इसके आयोजन का नेतृत्व कर रहे हैं।स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड रांची के रिसर्च एंड डेवलपमेंट सेंटर फॉर आयरन एंड स्टील के कार्यकारी निदेशक संदीप कुमार कर उद्घाटन भाषण देंगे, जबकि रांची नगर निगम के आयुक्त आईएएस सुशांत गौरव समापन सत्र को संबोधित करेंगे। दोनों इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे।



वक्ताओं की सूची इटली,चीन,संयुक्त राज्य अमेरिका और भारत के संस्थानों तक फैली हुई है।पोलिटेक्निको दी मिलानो, इटली के एसोसिएट प्रोफेसर डॉक्टर जियाम्बत्तिस्ता ग्रुओसो विद्युत वाहन चार्जिंग के विद्युत एवं संचार नेटवर्क के साथ एकीकरण पर व्याख्यान देंगे। साउदर्न यूनिवर्सिटी ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी चीन के पीआई लैब्स से जुड़े डॉक्टर ललितेश कुमार प्रोटॉन एक्सचेंज मेम्ब्रेन फ्यूल सेल प्रणालियों के लिए पोर्ट-हैमिल्टोनियन नियंत्रण पर चर्चा करेंगे। माइक्रोसॉफ्ट के प्रत्युष आनंद ऊर्जा दक्ष सॉफ्टवेयर एवं फर्मवेयर प्रथाओं पर प्रस्तुति देंगे,जबकि क्वार्ब्ज इन्फो सिस्टम कानपुर की एप्लिकेशन इंजीनियर एरा बाजपेयी डिजिटल कंट्रोल प्रणालियों के लिए हार्डवेयर-इन-द-लूप सिमुलेशन पर चर्चा करेंगी।



इसके अलावा भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान गोवा के प्रोफेसर तथा राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान वारंगल के पूर्व निदेशक प्रोफेसर विद्याधर सुबुद्धि एडेप्टिव कंट्रोल प्रणालियों पर तथा भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईएसएम) धनबाद के डॉक्टर कल्याण चटर्जी ऊर्जा अनुप्रयोगों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एवं साइबर सुरक्षा विषय पर सत्र आयोजित करेंगे। इसके अलावा वीएनआईटी नागपुर,एनआईटी रायपुर,एनआईटी राउरकेला,एनआईटी तिरुचिरापल्ली,एनआईटी दुर्गापुर,बिट्स पिलानी,एमएनएनआईटी इलाहाबाद,यशवंतराव चव्हाण अभियांत्रिकी महाविद्यालय तथा पंजाब अभियांत्रिकी महाविद्यालय चंडीगढ़ के संकाय सदस्य भी अपने व्याख्यान प्रस्तुत करेंगे।बिरला प्रौद्योगिकी संस्थान मेसरा के तीन संकाय सदस्य विभागाध्यक्ष डॉक्टर सुधांशु कुमार मिश्रा,डॉक्टर टी घोष और डॉक्टर शिवा एस सरोद सोलर पीवी नियंत्रण,ग्रीन हाइड्रोजन और स्मार्ट ऊर्जा प्रणालियों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर चर्चा करेंगे।



बिरला प्रौद्योगिकी संस्थान मेसरा में पहले ही 19 राज्यों और अंतरराष्ट्रीय संस्थानों,जिनमें ईटीएच ज्यूरिख,यूनिवर्सिटी ऑफ इलिनोइस,सिंगापुर और इंटेल और कैलिफ़ोर्निया शामिल हैं। इनसे 120 से अधिक प्रतिभागियों का पंजीकरण हो चुका है। यह विषय की प्रासंगिकता और अंतरराष्ट्रीय तकनीकी शिक्षा में संस्थान की प्रतिष्ठा का प्रमाण है।



संकाय विकास कार्यक्रम समन्वयक डॉक्टर गौरी शंकर गुप्ता ने कहा,इस कार्यक्रम के माध्यम से सभी संकाय सदस्य अपने साथ यह ज्ञान कक्षाओं,प्रयोगशालाओं तथा अनुप्रयुक्त शोध वातावरण में लेकर जाएंगे। सत्रों को इस प्रकार संरचित किया गया है कि शिक्षक स्मार्ट ग्रिड,एआई आधारित ऊर्जा प्रणालियों,विद्युत गतिशीलता तथा रिन्यूएबल ऊर्जा एकीकरण जैसे उभरते क्षेत्रों से सीधे जुड़ सकें।



डॉ. गौरी शंकर गुप्ता ने कहा,भारत का स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण केवल इन्फ्रास्ट्रक्चर निवेश पर ही नहीं, बल्कि तकनीकी रूप से प्रशिक्षित शिक्षकों और शोधकर्ताओं की उपलब्धता पर भी निर्भर करेगा, जो अगली पीढ़ी की विद्युत प्रणालियों का समर्थन कर सकें।


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