इटखोरी में यूजीसी द्वारा लागू किए गए एस्ट्रोसिटी एक्ट के विरोध में सवर्ण समाज ने जताया विरोध,फूंका पुतला

इटखोरी में यूजीसी द्वारा लागू किए गए एस्ट्रोसिटी एक्ट के विरोध में सवर्ण समाज ने जताया विरोध,फूंका पुतला

31 Jan 2026 |  22

 



पूर्वांचल सूर्य प्रतिनिधि,इटखोरी,चतरा।प्रखंड के कृषि फार्म प्रांगण में इटखोरी के सवर्ण समाज के लोगों ने यूजीसी द्वारा लागू  किए गए एस्ट्रोसिटी एक्ट के विरोध में बैठक की। इस बैठक की अध्यक्षता श्याम प्रसाद सिंह द्वारा की गई।बैठक में बड़ी संख्या में सवर्ण समाज के लोग उपस्थित हुए। 



बैठक में उपस्थित सवर्ण समाज के लोगों ने यूजीसी एक्ट का विरोध करते हुए कहा कि पहले से ही सरकार द्वारा सवर्ण समाज के विरोध में एससी-एसटी एक्ट और आरक्षण जैसे दमनकारी कानून लागू किए गए हैं। फिलहाल केंद्र में बैठी भारतीय जनता पार्टी की सरकार यूजीसी कानून के द्वारा सवर्ण समाज के छात्र-छात्राओं के भविष्य को अंधकार में धकेलना का कुत्सित प्रयास कर रही है।सरकार के इस फैसले का विरोध पूरे देश में सवर्ण समाज के द्वारा किया जा रहा है। देश में जगह-जगह इस दमनकारी कानून के विरोध में लगातार धरना प्रदर्शन का दौर जारी है। इसी क्रम में इटखोरी में भी सवर्ण समाज इस एक्ट के विरुद्ध में एक मंच पर आ गया है। 



बैठक की अध्यक्षता कर रहे श्याम प्रसाद सिंह ने कहा कि सवर्ण समाज देश में काम नहीं है बल्कि यह एक मजबूत प्रभावशाली और संगठित स्वरूप में है। सवर्ण की प्रभावशीलता को खत्म करने के लिए सरकार के द्वारा स्वतंत्रता के बाद से लगातार सवर्ण विरोधी कानून लाकर के इनके प्रभाव को कम करने का प्रयास किया जा रहा है। श्याम सिंह ने कहा कि यह सरकार भी पूर्व की सरकारों के नक्शे कदम पर चलते हुए सवर्ण समाज के विरोध में दमनकारी कानून बना रही है,जिसे हम सबको पुरजोर विरोध करना जरूरी हो गया है।यह समय की मांग है कि अब सरकार द्वारा लाए गए नियमों के विरुद्ध में समाज के सभी लोग एकजुट होकर विरोध करें। 



श्याम सिंह ने कहा कि यह वही समाज है,जिसने सदियों से भारतीय संस्कृति धर्म और राष्ट्र की रक्षा के लिए बढ़-चढ़कर के भाग लिया।स्वतंत्रता संग्राम के संघर्ष के दिनों में इसी समाज के लोगों ने अंग्रेजों के विरुद्ध आंदोलन किया। देश के लिए अपनी जागीर और राजपाट तक देश को दे दिया परंतु आज इसी समाज को संविधान की आड़ लेकर शोषित और उत्पीड़न करने का कार्य किया जा रहा है,यह कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।अब वक्त आ गया है कि हम सभी अपने अधिकार अपने-अपने बच्चों के भविष्य और अपने स्वाभिमान, आत्म सम्मान की रक्षा के लिए एक जुट होकर सरकार द्वारा सवर्णों के खिलाफ लाए जा रहे हर कानून का विरोध करना होगा। यह वक्त चुपचाप बैठकर तमाशा देखने का नहीं है बल्कि सरकार की नीतियों के विरोध में एकजुट होकर अपने अधिकारों के लिए उठ खड़ा होने का है। 



मौके पर बोलते हुए गुड्डन सिंह ने कहा कि केंद्र सरकार को सवर्ण समाज के हितों को दरकिनार कर किसी खास वर्ग और समुदाय को खुशकर वोट बैंक बनाने की नीति निंदनीय है। सरकार को ऐसे कानून को जो समाज में विघटनकारी शक्तियों को बढ़ावा दे समाज में सामाजिक समरसता को तोड़ने और सामाजिक अराजकता फैलाने वाले कानून को हर हाल में वापस लेना होगा। संविधान की आड़ लेकर सरकार द्वारा सवर्ण समाज के साथ धोखा किया जाना अब बर्दाश्त से बाहर है।



गुड्डन सिंह ने कहा कि जब तक केंद्र सरकार सवर्ण विरोधी कानून को वापस नहीं लेती है तब तक आंदोलन चलता रहेगा। अब सवर्ण समाज को अपने स्वाभिमान और आत्म सम्मान के लिए एकजुट होकर उठ खड़े होने का वक्त आ गया है। 



कार्यक्रम को संबोधित करते हुए टुन्नी सिंह ने कहा कि जब तक सरकार यूजीसी एक्ट को वापस नहीं लेती है तब तक सवर्ण समाज का विरोध जारी रहेगा। 



लोगों ने भारतीय जनता पार्टी सरकार के नीतियों की कड़े शब्दों में भर्त्सना की। बैठक में उपस्थित लोगों ने कहा कि वर्तमान सरकार अंग्रेज सरकार के नक्शे कदम पर चल रही है, सरकार की दमनकारी नीतियां सिर्फ सवर्ण समाज के लिए है। सरकार सवर्ण समाज के छात्र-छात्राओं के साथ अन्याय पूर्ण असंवैधानिक दमनकारी नीतियां बनाकर उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ करने का काम कर रही है। 



बैठक के बाद सवर्ण समाज के लोगों ने इटखोरी चौक पर आकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह का पुतला फूंक कर अपना आक्रोश व्यक्त किया। 



बैठक में गुड्डन सिंह,नागिन सिंह,हरि सिंह,कैलाश सिंह, सच्चिदानंद प्रसाद,विनय सिंह,निर्भय पांडेय,रणधीर सिंह, निरंजन सिंह,शैलेश सिंह योगेंद्र सिंह,मुन्ना सिंह समेत बड़ी संख्या में सवर्ण समाज के समाजसेवी राजनीतिक कार्यकर्ता, बुद्धिजीवी और छात्र शामिल थे।


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