अयोध्या।रामनगरी अयोध्या सरयू नदी के किनारे बसी है। रामनगरी विश्व में अपनी सांस्कृतिक और धार्मिक आस्था के लिए विख्यात है।जल प्रबंधन और स्वच्छता के क्षेत्र में भी रामनगरी एक नया मील का पत्थर साबित हो रही है।राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (एनएमसीजी) के तहत रामनगरी में 260 करोड़ की लागत से दो महत्वपूर्ण सीवेज ट्रीटमेंट परियोजनाओं को सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया है। इन परियोजनाओं में 3.3 करोड़ लीटर प्रति दिन क्षमता का नया सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट और नालों का इंटरसेप्शन एंड डाइवर्जन नेटवर्क शामिल है।
बता दें कि अब तक जो गंदा और अनुपचारित पानी सीधे सरयू नदी में गिरता था,उसे अब पूरी तरह रोक दिया गया है।एनएमसीजी ने इंटरनेट मीडिया एक्स पर इस उपलब्धि को साझा करते हुए गर्व से कहा है,अयोध्या केवल आस्था का शहर नहीं है,बल्कि अब यह स्वच्छ जल प्रबंधन का एक बेहतरीन उदाहरण भी बन गया है।
स्वच्छ जल,समृद्ध अयोध्या का संकल्प
इन विकास कार्यों की शुरुआत साल 2021 में नालों को मोड़ने के काम से हुई थी,इसके जरिये गंदे पानी के बहाव को सरयू नदी में जाने से रोका गया।इसके बाद साल 2025 में 3.3 करोड़ लीटर प्रति दिन क्षमता के नए सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट के शुरू होने से रामनगरी की जल शोधन क्षमता में अभूतपूर्व बढ़ोतरी हुई है।यह आधुनिक बुनियादी ढांचा 2024-25 की दूसरी छमाही में पूरी की गई सात प्रमुख सीवरेज परियोजनाओं का हिस्सा है।
सरयू के कायाकल्प की एक व्यापक और दीर्घकालिक पहल
यह सफलता रातोंरात नहीं मिली है।इसकी नींव मई 2018 में ही रख दी गई थी,जब एनएमसीजी ने 50 लाख लीटर प्रति दिन सीवेज ले जाने वाले पांच बड़े नालों को रोकने के लिए एक परियोजना को मंजूरी दी थी।उस समय रामनगरी में पहले से ही 1.2 करोड़ लीटर प्रति दिन क्षमता का एक सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट कार्यरत था,और इस नई व्यवस्था ने पुराने संयंत्र के पूर्ण उपयोग को भी सुनिश्चित किया है।
नमामि गंगे कार्यक्रम केवल सीवेज उपचार तक ही सीमित नहीं
नमामि गंगे कार्यक्रम केवल सीवेज उपचार तक ही सीमित नहीं है,बल्कि इसमें ठोस अपशिष्ट प्रबंधन,रिवरफ्रंट डेवलपमेंट,पारिस्थितिकी बहाल,वनीकरण,जैव विविधता संरक्षण और जन-भागीदारी जैसे व्यापक आयाम भी शामिल हैं।सरयू का निर्मल होता पानी इस बात का प्रतीक है कि स्वच्छ जल,स्वस्थ रामनगरी और समृद्ध अयोध्या का संकल्प अब हकीकत में बदल रहा है।