मायावती के सियासी गढ़ में आकाश उतरेंगे,बुआ के मिशन को धार देंगे,शायद 2027 में संवरेगी बसपा की ज़मीन:धनंजय सिंह 

मायावती के सियासी गढ़ में आकाश उतरेंगे,बुआ के मिशन को धार देंगे,शायद 2027 में संवरेगी बसपा की ज़मीन:धनंजय सिंह 

24 Aug 2026 |  14

 



लखनऊ।उत्तर प्रदेश में गौतमबुद्धनगर बहुत अहम जिला है। गौतमबुद्धनगर सियासत में बहुजन समाज पार्टी के लिए गौतमबुद्धनगर सिर्फ ज़िला नहीं,बल्कि बसपा मुखिया मायावती की जन्मभूमि बादलपुर और बसपा की वैचारिक अस्मिता का प्रतीक रहा है।नोएडा को सजाने और संवारने में मायावती का बहुत बड़ा रोल है।मगर यूपी के साथ ही मायावती के गृह जिले में भी बसपा कमजोर पड़ी। 2027 के विधानसभा चुनाव की बढ़ती लपटों को देखते हुए बसपा के खिसके हुए सियासी आधार को दोबारा से पाने के लिए मायावती ने अपने भतीजे पार्टी के राष्ट्रीय को ऑर्डिनेटर आकाश आनंद को सियासी रणभूमि में उतार रही हैं।



गौतमबुद्ध नगर में समाजवादी पार्टी और भारतीय जनता पार्टी के शक्ति प्रदर्शन के बाद अब बहुजन समाज पार्टी पार्टी मुखिया मायावती के गृह जिले से अपने मिशन-2027 का जबरदस्त आगाज करने जा रही है।दादरी के बजाय जेवर के दनकौर में जनसभा आयोजित कर और प्रत्याशी की घोषणा की कमान आकाश आनंद को सौंपकर बसपा अपने पारंपरिक गढ़ में खिसके जनाधार को फिर से साधने की कवायद में है।



पहले दादरी में सपा ने बड़ी सभा कर चुनावी माहौल बनाया, इसके बाद भाजपा ने भी दादरी में शक्ति प्रदर्शन किया और अब बसपा ने जेवर क्षेत्र से अपना चुनावी अभियान शुरू करने जा रही है।जेवर के दनकौर में स्थिति आदर्श इंटर कॉलेज के मैदान में बसपा ने रैली रखी है,इस रैली को आकाश आनंद संबोधित करेंगे।



जेवर विधानसभा से बसपा प्रत्याशी के रूप में सतबीर गुर्जर के नाम का आकाश आनंद ऐलान करेंगे।आकाश की यूपी में यह दूसरी रैली है,इससे पहले आकाश ने हाथरस से मिशन-2027 का आगाज किया था।जेवर में रैली कर आकाश बसपा के पुराने सियासी गढ़ को दोबारा मजबूत करेंगे।



जेवर को आकाश आनंद ने बसपा के चुनावी अभियान को धार देने के लिए इसलिए चुना है,क्योंकि जेवर विधानसभा बसपा के लिए बहुत अहम है।जेवर विधानसभा बसपा का पुराना और मजबूत गढ़ रहा है।मायावती का गृह क्षेत्र और बसपा का स्वर्णिम दौर में गौतमबुद्धनगर की दादरी और जेवर विधानसभा बसपा का पुराना और अजेय किला माना जाता रहा है।



जेवर विधानसभा पर 10 साल से भाजपा के जीत परचम लहरा रहा है,लेकिन बसपा का पुराना इलाका रहा है,इसीलिए मायावती ने जेवर विधानसभा में उम्मीदवार के नाम के ऐलान करने के लिए आकाश आनंद को भेज रही हैं।आकाश मंगलवार को जेवर के दनकौर इलाके में बसपा उम्मीदवार के रूप में सतबीर गुर्जर के नाम का ऐलान करेंगे और जनसभा को संबोधित कर सियासी समीकरण साधेंगे। 



गौतमबुद्धनगर में बसपा का जेवर और दादरी मजबूत गढ़ था। जेवर विधानसभा से बसपा ने 2002 में नरेंद्र कुमार, 2007 में होराम सिंह और 2012 में वेदराम भाटी को जिताकर लगातार हैट्रिक बनाई थी।दादरी विधानसभा में भी सतवीर गुर्जर के जरिए बसपा ने काफी लंबे समय तक दबदबा कायम रखा था, लेकिन बसपा के सत्ता से बाहर होते ही सारे गेम फेल हो गए।



पिछले कुछ चुनाव में भाजपा ने इस पूरे इलाके में अपनी गहरी पैठ बना ली और बसपा का पारंपरिक कैडर बिखरता चला गया।ऐसे में मायावती के गृह ज़िले में बसपा की वापसी की साख का बड़ा सवाल बन चुकी है।आकाश आनंद मिशन 2027 के तहत अपनी दूसरी रैली जेवर से कर रहे हैं ताकि बसपा के कैडर को सियासी संदेश दिया जा सके।



बसपा ने आकाश आनंद की सभा के लिए दादरी की बजाय जेवर विधानसभा को चुना है,इसके पीछे बसपा की गहरी सियासी रणनीति है।जेवर की बदलती सियासत भी अहम मानी जा रही है।एयरपोर्ट से जेवर क्षेत्र की सियासी अहमियत में लगातार बढ़ोतरी हो रही है।बसपा जेवर से अपने पुराने वोट बैंक और सामाजिक समीकरणों को फिर से साधने की कोशिश करती नजर आ रही है,जिसके लिए बसपा ने गुर्जर समाज से आने वाले सतवीर गुर्जर पर दांव खेलने का प्लान बनाया है।



जेवर में होने वाली बसपा की जनसभा के पीछे सामाजिक समीकरण और गुर्जर-दलित वोट बैंक भी है।जेवर और दादरी में गुर्जर,दलित और मुस्लिम मतदाताओं की निर्णायक भूमिका है।आकाश आनंद की नजर इसी सामाजिक समीकरण (सोशल इंजीनियरिंग) को साधने और बसपा के मूल कैडर वोट बैंक को वापस जोड़ने पर है।



मायावती ने आकाश आनंद को दोबारा आगे बढ़ाया है।इसके बाद आकाश आक्रामक तेवरों के साथ मैदान में उतरे हैं। हाथरस की रैली के बाद अब पश्चिमी यूपी के इस अहम पड़ाव पर आकाश के सामने तीन मुख्य चुनौतियां हैं।बसपा के खामोश बैठे कैडर में नया जोश भरना है,बसपा के सत्ता से बाहर होने और एक के बाद एक चुनावी मात से पार्टी के सुस्त पड़े ज़मीनी कार्यकर्ताओं को फिर से सक्रिय करना और उनमें जीत का भरोसा जगाना।



आकाश आनंद जिस तरह से इन दिनों युवाओं के मुद्दों आरक्षण,रोजगार और सम्मान पर मुखर होकर नए वोटरों को बसपा से जोड़ने का प्रयास कर रहे हैं,उससे साफ है कि बसपा की नजर Gen-Z वोटों को जोड़ने की है।मायावती भी लगातार युवा पीढ़ी के मुद्दों को उठाकर उन्हें साधने में जुटी हैं।इसके अलावा दलित समुदाय के युवाओं के बीच चंद्रशेखर आजाद के बढ़ते प्रभाव को काउंटर करने की रणनीति है।


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