म्यूल बैंक खातों पर धनबाद पुलिस ने कसा शिकंजा,बैंक प्रबंधकों के साथ हुई अहम बैठक,साइबर अपराध रोकने को पुलिस और बैंकों ने मिलाया हाथ,संदिग्ध खातों पर रहेगी नजर

म्यूल बैंक खातों पर धनबाद पुलिस ने कसा शिकंजा,बैंक प्रबंधकों के साथ हुई अहम बैठक,साइबर अपराध रोकने को पुलिस और बैंकों ने मिलाया हाथ,संदिग्ध खातों पर रहेगी नजर

20 Aug 2026 |  42

 



पूर्वांचल सूर्य प्रतिनिधि



धनबाद।धनबाद जिले में बढ़ते वित्तीय साइबर अपराध पर नियंत्रण को लेकर धनबाद पुलिस ने अब बैंकों के साथ समन्वय और निगरानी व्यवस्था को और मजबूत करने की पहल शुरू कर दी है।साइबर सुरक्षा जागरूकता अभियान के तहत बुधवार को समाहरणालय स्थित पुलिस सभागार में बैंक प्रबंधकों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता ग्रामीण एसपी एस मोहम्मद याकूब ने की।बैठक में साइबर डीएसपी प्रदीप कुमार साव,सिंदरी एसडीपीओ प्रकाश चंद्र महतो के अलावा सिंदरी अंचल के 43 सरकारी एवं निजी बैंकों के शाखा प्रबंधक उपस्थित रहे।



बैठक का मुख्य उद्देश्य वित्तीय साइबर अपराध की रोकथाम, संदिग्ध बैंक खातों की पहचान,साइबर ठगी की रकम के लेनदेन पर निगरानी और पुलिस-बैंक के बीच त्वरित सूचना तंत्र को मजबूत करना रहा। बैठक के दौरान अधिकारियों ने बैंकिंग व्यवस्था के माध्यम से होने वाले साइबर अपराध के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की।



ग्रामीण एसपी एस मोहम्मद याकूब ने कहा कि वित्तीय साइबर अपराध पर प्रभावी रोकथाम के लिए पुलिस और बैंकों के बीच बेहतर समन्वय बेहद जरूरी है। साइबर अपराध को रोकना केवल पुलिस की जिम्मेवारी नहीं है,बल्कि इसमें बैंकिंग संस्थानों,आम नागरिकों और अन्य संबंधित एजेंसियों की भी महत्वपूर्ण भूमिका है।यदि बैंक स्तर पर किसी संदिग्ध गतिविधि की समय रहते पहचान हो जाए और उसकी सूचना तत्काल पुलिस को मिल जाए तो साइबर ठगी की रकम के ट्रांजैक्शन को रोकने के साथ-साथ अपराधियों तक पहुंचना भी आसान हो सकता है।



बैठक में म्यूल बैंक अकाउंट के माध्यम से होने वाले वित्तीय साइबर अपराध को गंभीर चुनौती के रूप में चिन्हित किया गया।अधिकारियों ने बताया कि साइबर अपराधियों द्वारा दूसरे लोगों के बैंक खातों का इस्तेमाल ठगी की रकम को प्राप्त करने और आगे दूसरे खातों में ट्रांसफर करने के लिए किया जाता है। ऐसे खातों की पहचान कर समय रहते कार्रवाई करना साइबर अपराध की रोकथाम में महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।



ग्रामीण एसपी एस मोहम्मद याकूब ने कहा कि आने वाले समय में धनबाद को वित्तीय साइबर अपराध से मुक्त कराना पुलिस का लक्ष्य है।इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए साइबर अपराध में इस्तेमाल होने वाले म्यूल बैंक खातों की पहचान करना और उन्हें निष्क्रिय कराना बेहद आवश्यक है। उन्होंने बैंक अधिकारियों से ऐसे खातों की गतिविधियों पर विशेष निगरानी रखने और संदिग्ध लेनदेन सामने आने पर बिना विलंब पुलिस को जानकारी उपलब्ध कराने को कहा।



ग्रामीण एसपी एस मोहम्मद याकूब ने बैंक प्रबंधकों को निर्देश दिया कि किसी खाते में अचानक बड़ी रकम का ट्रांजैक्शन होता है और खाते की सामान्य गतिविधियों की तुलना में यह लेनदेन असामान्य या संदिग्ध प्रतीत होता है तो उसकी तत्काल जांच की जाए और आवश्यकतानुसार पुलिस को इसकी सूचना दी जाए।उन्होंने कहा कि विशेष रूप से ऐसे खातों पर नजर रखी जाए,जिनमें खाता खुलने के तुरंत बाद बड़ी रकम का लगातार लेनदेन शुरू हो जाता है। इसके अलावा एक ही खाते में अलग-अलग लोगों या स्थानों से बड़ी संख्या में रकम आने अथवा थोड़े समय के भीतर रकम को दूसरे खातों में ट्रांसफर किए जाने जैसी गतिविधियों को भी गंभीरता से लेने की जरूरत है।



 नए खातों के ट्रांजैक्शन की निगरानी



बैठक में नए खोले जा रहे बैंक खातों को लेकर भी विशेष दिशा-निर्देश दिए गए।बैंक प्रबंधकों से कहा गया कि नए खातों में होने वाले लेनदेन पर विशेष निगरानी रखी जाए। यदि किसी नए खाते में खाता खुलने के तुरंत बाद असामान्य तरीके से बड़ी रकम का लेनदेन शुरू हो जाता है तो बैंक स्तर पर उसकी गतिविधियों की जांच की जाए।



पुलिस अधिकारियों ने कहा कि साइबर अपराधी कई बार दूसरे लोगों को पैसे या अन्य प्रलोभन देकर उनके नाम पर बैंक खाते खुलवाते हैं और बाद में उन्हीं खातों का इस्तेमाल साइबर ठगी की रकम के लेनदेन में करते हैं। ऐसे मामलों की पहचान के लिए बैंक स्तर पर सतर्कता जरूरी है।



ग्रामीण एसपी एस मोहम्मद याकूब ने बैंक प्रबंधकों को निर्देश दिया कि समय-समय पर खाताधारकों का फिजिकल वेरिफिकेशन कराया जाए। इसके साथ ही बैंक खाते से लिंक मोबाइल नंबर का भी सत्यापन सुनिश्चित करने को कहा गया। उन्होंने कहा कि खाता खोलने के दौरान उपलब्ध कराई गई जानकारी और बाद में खाते के संचालन के दौरान सामने आने वाली गतिविधियों में किसी प्रकार का अंतर मिले तो उसे गंभीरता से लिया जाना चाहिए।उन्होंने बैंक अधिकारियों से अपने-अपने स्तर पर संदिग्ध खातों की पहचान करने और उनकी जानकारी पुलिस के साथ साझा करने की अपील की।



बैठक में पुलिस ने बैंक प्रबंधकों को एक और महत्वपूर्ण निर्देश दिया। यदि किसी विशेष इलाके में रहने वाले लोगों की बड़ी संख्या अचानक किसी बैंक की शाखा में खाता खुलवाने पहुंचती है तो इसकी जानकारी पुलिस को तत्काल देने को कहा गया।



पुलिस का मानना है कि एक ही इलाके या समूह के बड़ी संख्या में लोगों द्वारा कम समय में खाते खुलवाने के पीछे यदि कोई संगठित गतिविधि नजर आती है तो उसकी जांच जरूरी है। ऐसी गतिविधियों के पीछे साइबर अपराधियों का नेटवर्क या म्यूल बैंक खातों का संचालन करने वाला गिरोह भी हो सकता है।



बैंक प्रबंधकों को निर्देश दिया गया कि यदि कोई व्यक्ति लगातार अलग-अलग लोगों को लेकर बैंक में खाता खुलवाने पहुंचता है या कई लोगों के बैंक खाते खुलवाने में सक्रिय भूमिका निभाता है तो ऐसे बिचौलियों की जानकारी भी पुलिस से साझा की जाए।



पुलिस अधिकारियों ने कहा कि किसी व्यक्ति द्वारा लगातार अलग-अलग लोगों को बैंक में लाकर खाते खुलवाने की गतिविधि सामान्य बैंकिंग व्यवहार से अलग होने पर उसकी जानकारी की जांच की जानी चाहिए। ऐसे लोगों की भूमिका संदिग्ध पाए जाने पर पुलिस स्तर से भी आवश्यक कार्रवाई की जा सकती है।



बैठक में ऑनलाइन गेमिंग और सट्टेबाजी से जुड़े बैंक खातों को लेकर भी चर्चा हुई।अधिकारियों ने बैंक प्रबंधकों से ऐसे खातों और उनमें होने वाले असामान्य वित्तीय लेनदेन को चिन्हित करने को कहा। यदि किसी खाते में ऑनलाइन गेमिंग या सट्टेबाजी से संबंधित संदिग्ध गतिविधियां नजर आती हैं तो उसकी जानकारी पुलिस के साथ साझा करने का निर्देश दिया गया।



ग्रामीण एसपी एस मोहम्मद याकूब ने कहा कि साइबर अपराध में समय सबसे महत्वपूर्ण है। ठगी की रकम एक खाते से दूसरे खाते और फिर कई अन्य खातों में तेजी से ट्रांसफर की जाती है। ऐसे में यदि बैंक स्तर पर संदिग्ध ट्रांजैक्शन की जानकारी पुलिस को तुरंत मिल जाए तो रकम को आगे जाने से रोकने और अपराधियों के नेटवर्क का पता लगाने में काफी मदद मिल सकती है।उन्होंने बैंक प्रबंधकों से पुलिस के साथ लगातार समन्वय बनाए रखने और साइबर अपराध से संबंधित किसी भी संदिग्ध गतिविधि को तत्काल साझा करने को कहा। बैठक के दौरान बैंक अधिकारियों ने भी साइबर अपराध की रोकथाम के लिए पुलिस को आवश्यक सहयोग देने का आश्वासन दिया।



पुलिस अधिकारियों ने कहा कि साइबर अपराध के खिलाफ चलाया जा रहा जागरूकता अभियान केवल लोगों को जागरूक करने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वित्तीय संस्थानों के साथ समन्वय कर साइबर अपराधियों के पूरे नेटवर्क पर प्रभावी कार्रवाई की दिशा में भी काम किया जाएगा। बैंकिंग सिस्टम में संदिग्ध खातों और लेनदेन की पहचान कर समय रहते कार्रवाई करना इस अभियान का महत्वपूर्ण हिस्सा होगा।


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