राम मंदिर में छत से पानी टपकने,गर्भगृह में पानी निकासी की दिक्कत,जानें सच

राम मंदिर में छत से पानी टपकने,गर्भगृह में पानी निकासी की दिक्कत,जानें सच

25 Jun 2024 |  65

 

अयोध्या।रामनगरी अयोध्या के राम मंदिर में प्रभु श्रीराम के गर्भगृह में पानी निकलने की समस्‍या और मंदिर परिसर में छत से पानी टपकने की खबरों के बीच राम मंदिर की भवन निर्माण समिति को सामने आना पड़ा है।समिति के अध्‍यक्ष नृपेन्द्र मिश्रा ने इस सभी तथ्‍यों पर से पर्दा हटाया।

 

राम मंदिर भवन निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेन्द्र मिश्रा की ओर से कहा गया है कि मैंने खुद निरीक्षण किया है और कहीं भी कोई दिक्कत नहीं है।नृपेन्द्र मिश्रा ने बताया कि आखिर पहली बरसात में ही छत से मंदिर परिसर के अंदर पानी क्‍यों आने लगा और गर्भगृह में क्‍या वाकई पानी निकासी की समस्‍या है।

 

नृपेन्द्र मिश्रा ने कहा है कि मंदिर परिसर में पानी लीकेज नहीं है,कोई भी समस्या नहीं है,मैंने स्वयं निरीक्षण किया था। निर्माणाधीन मंडप की छत दूसरी मंजिल पर जाकर पूरी होगी। द्वितीय तल पर गुण मंडप की छत पड़ने के बाद ही बारिश का पानी मंदिर में प्रवेश करने से रूक सकेगा।श्रद्धालुओं के सुविधा के लिए गुड मंडप की छत पर अस्थाई निर्माण करके पानी और धूप से बचाव को लेकर उपाय किए गए हैं।

 

नृपेन्द्र मिश्रा ने कहा है कि ये सब भ्रम लोगों ने पैदा किया है।बिजली की अंडरग्राउंड वायरिंग में अभी तार डालना बाकी है, जिसके लिए पाइप खुला हुआ है और उसी पाइप के जरिये नीचे सीवेज में पानी आया है।निर्माण में किसी भी तरीके की कोई कमी नहीं है।राम मंदिर में उच्चतम स्तर का निर्माण कार्य हो रहा है।

 

गर्भगृह में पानी निकासी की समस्‍या को लेकर भी नृपेन्द्र मिश्रा ने जानकारी दी।उन्‍होंने कहा कि गर्भगृह में भगवान के स्नान और श्रृंगार का ही जल होता है।साधु संतों की राय पर भगवान के स्नान और श्रृंगार के जल को एक कुंड में एकत्रित किया जाता है।श्रद्धालुओं को स्नान का जल उनकी मांग के अनुरूप उपलब्‍ध कराया जाता है।पानी के निकासी के लिए सभी मंडप में परनाले बनाए गए हैं।

 

नृपेन्द्र मिश्रा ने कहा कि राम मंदिर के फर्श को इस तरीके से बनाया गया है, ताकि पानी अपने आप बाहर निकल सके।नागर शैली में मंदिर सभी तरफ से बंद नहीं किया जाता है। मंदिर में मंडप के दाएं और बाएं तरफ का पोर्शन खुला हुआ है।संभव है कि तेज बारिश से मंडप में छींटा आ जाए।निर्माण के कारण पानी आने की मंदिर परिसर में कोई भी संभावना नहीं है।

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