प्रयागराज।विश्व के सबसे बड़े धार्मिक आयोजन महाकुंभ में अपनी वेश भूषा से चर्चा में रहने वाले शिव भक्त मौनी महाराज उर्फ मौनी बाबा का शिविर माघ मेले में भी लग गया है।मौनी बाबा हमेशा से अपने शिविर में अलग-अलग तरह के रुद्राक्ष से शिवलिंग की स्थापना करते हैं। इस बार मौनी बाबा माघ मेले में रुद्राक्ष से 11 फीट ऊंचा शिवलिंग बनाएंगे,इस शिवलिंग को बनाने के लिए 5 करोड़ 51 लाख रुद्राक्ष का इस्तेमाल किया जाएगा।शिवलिंग बनाने की तैयारी भी शुरू हो गई है।
11 फीट ऊंचा होगा शिवलिंग
शिव भक्त मौनी बाबा ने बताया कि राष्ट्र रक्षा के साथ ही काशी-मथुरा में भव्य मंदिर निर्माण को लेकर मकर संक्रांति के पर्व से वह अपने संकल्पित अनुष्ठानों की शुरुआत करेंगे।मौनी बाबा ने कहा है कि वह अपने शिविर में 11 फीट ऊंचे भगवान शिव का रुद्राक्ष से शिवलिंग निर्माण करेंगे।यह शिवलिंग 5 करोड़ 51 लाख रुद्राक्ष से तैयार होगा। इस शिवलिंग का राष्ट्र रक्षा,आतंकवाद के विनाश,हिंदू राष्ट्र निर्माण,काशी-मथुरा में भव्य मंदिर निर्माण,भ्रूण हत्या बंद हो,गंगा अविरल और निर्मल हो इसके लिए अनुष्ठान करेंगे। देश में सुख शांति बनी रहे आतंकवाद का विनाश हो इसके लिए भी उनका संकल्प है।
सवा 11 लाख दीपों का होगा प्रज्जवलन
मौनी बाबा ने कहा है कि संकल्पित अनुष्ठान में 12 करोड़ 51 लाख महामंत्रों का जाप भी होगा,सवा 11 लाख दीपों का प्रज्जवलन होगा, 101 कुंटल हवन सामग्री की आहुति हवन कुंड में दी जाएगी। मौनी बाबा ने कहा है कि इस माघ मेले से प्रकृति बचाओ,पर्यावरण बचाओ,राष्ट्र बचाओ और मानव जीवन की रक्षा के लिए संदेश जाएगा। मौनी बाबा ने कहा है कि आतंकवाद विनाश के लिए 11 हजार काले त्रिशूल स्थापित किए जाएंगे। इनकी स्थापना के बाद ही महामंत्रों का जाप किया जाएगा।
रुद्राक्ष को ही अपना वस्त्र समझते हैं मौनी बाबा
बता दें कि शिव भक्त मौनी बाबा अमेठी जिले के गौरीगंज बाबूगंज के श्री परमहंस सेवा आश्रम के पीठाधीश्वर हैं।मौनी बाबा अपने आप में आकर्षण का केंद्र बने रहते हैं।सिर से लेकर आधे शरीर पर रुद्राक्ष ही रहता हैं।रुद्राक्ष को ही मौनी बाबा अपना वस्त्र समझते हैं,वो उसे कभी नहीं उतारते।मौनी बाबा को इस बार माघ मेले में जमीन नहीं मिली थी,जिससे नाराज होकर वो धरने पर बैठ गए थे।हालांकि काफी जद्दोजहद के बाद मेला प्रशासन ने मौनी बाबा को जमीन आवंटित की है।पिछले साल विश्व के सबसे बड़े धार्मिक आयोजन महाकुंभ में भी मौनी बाबा ने अपने शिविर में विश्व शांति के लिए अलग-अलग कई यज्ञ कराये थे।