6 पांव वाला रहस्यमयी तख्त,इसे कहते हैं मौत का सिंहासन, आज तक कोई बैठने की नहीं कर पाया हिम्मत

6 पांव वाला रहस्यमयी तख्त,इसे कहते हैं मौत का सिंहासन, आज तक कोई बैठने की नहीं कर पाया हिम्मत

24 Jul 2026 |  3

 



कौशांबी।देश में कई ऐसी जगहें हैं,जिनसे जुड़ी कहानियों से आज भी लोग सोचने पर मजबूर हो जाते हैं।कुछ बातों का जवाब इतिहास नहीं दे पाता और कुछ को लोग आस्था से जोड़कर देखते हैं।उत्तर प्रदेश के कौशांबी जिले में भी एक ऐसी ही रहस्यमयी जगह है,जिसके बारे में सुनते ही लोगों के रोंगटे खड़े हो जाते हैं।गंगा किनारे कालेश्वर घाट पर बनी नागा कुटी में एक ऐसा तख्त रखा है,जिसे लोग मौत का सिंहासन भी कहते हैं।कहा जाता है कि इस तख्त पर आज तक जिसने भी बैठने की कोशिश की,उसका अंजाम अच्छा नहीं हुआ। यही वजह है कि लोग आज भी इससे दूर रहना ही बेहतर समझते हैं।कहते हैं दूध का जला छाछ भी फूंक-फूंक कर पीता है,इसलिए यहां आने वाले लोग भी इस तख्त को सिर्फ दूर से देखते हैं।



गंगा किनारे मौजूद है यह रहस्यमयी तख्त



कौशांबी के कड़ा धाम के कालेश्वर घाट पर गंगा के किनारे बनी नागा कुटी लंबे समय से लोगों की आस्था और जिज्ञासा का केंद्र बनी हुई है।कुटी में रखा यह तख्त देखने में दूसरे तख्तों से बिल्कुल अलग है।आम तौर पर तख्त चार पांव के होते हैं,लेकिन यह तख्त छह पांव का है।यही बात इसे और भी अलग बनाती है।स्थानीय लोग बताते हैं कि यह तख्त कई सौ साल पुराना है और इसे हाथी की हड्डियों से बनाया गया था। इसी वजह से इसकी चर्चा दूर-दूर तक होती है.



क्यों कहते हैं मौत का सिंहासन



इस तख्त को लेकर सबसे ज्यादा चर्चा इसकी रहस्यमयी कहानी की होती है।लोगों का कहना है कि जो भी इस पर बैठा,उसकी जिंदगी बदल गई,किसी की मानसिक हालत बिगड़ गई तो किसी की मौत हो गई।इन बातों का कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है,लेकिन इलाके के लोग इन कहानियों पर पूरा भरोसा करते हैं।यही वजह है कि इस तख्त का नाम सुनते ही लोगों के मन में डर बैठ जाता है।कहते हैं,जहां धुआं उठता है वहां लोग आग भी तलाशने लगते हैं।इस तख्त की कहानी भी कुछ ऐसी ही है।



आल्हा-ऊदल और बाबा उमरा से जुड़ा है रिश्ता



स्थानीय मान्यता के मुताबिक इस तख्त का संबंध अमरा गुरु और आल्हा-ऊदल की परंपरा से भी जोड़ा जाता है।लोगों का कहना है कि यह तख्त खास तौर पर बाबा उमरा के लिए बनवाया गया था।बाबा इसी तख्त पर बैठकर लोगों का मार्गदर्शन करते थे।बाद में जब उन्होंने जीवित समाधि ली तो यह तख्त वहीं का वहीं रह गया।तब से यह किसी के इस्तेमाल में नहीं आया।धीरे-धीरे इसके साथ कई तरह की कहानियां जुड़ती चली गईं और यह रहस्य का हिस्सा बन गया।



छह पांव वाला तख्त लोगों को करता है हैरान



इस तख्त की सबसे अलग बात इसके छह पांव हैं।आम आदमी जब पहली बार इसे देखता है तो उसकी नजर सबसे पहले इसी पर जाती है।लोग सोचते हैं कि आखिर ऐसा तख्त क्यों बनाया गया होगा।कई लोग इसे साधुओं की खास परंपरा से जोड़ते हैं,जबकि कुछ इसे उस समय की अनोखी कारीगरी मानते हैं।हालांकि इसका सही जवाब किसी के पास नहीं है। कहते हैं,जितने मुंह उतनी बातें,इस तख्त के बारे में भी हर व्यक्ति अपनी अलग कहानी सुनाता है।



हमेशा रहती है पहरेदारों की नजर



इस तख्त को देखने के लिए लोग दूर-दूर से आते हैं,लेकिन कोई इसे छू नहीं सकता,जिस कमरे में यह रखा गया है, वहां हमेशा ताला लगा रहता है।मंदिर की ओर से दो पहरेदार लगाए गए हैं,जो आने वाले लोगों को अंदर जाने या तख्त को छूने से रोकते हैं।उनका काम सिर्फ यही है कि कोई भी व्यक्ति इस तख्त के पास जाकर कोई हरकत न करे,इससे मंदिर की व्यवस्था भी बनी रहती है।



रोज होती है साफ-सफाई



हालांकि इस कमरे में आम लोगों का जाना मना है,लेकिन इसकी साफ-सफाई रोज की जाती है।मंदिर के पुजारी फरसा बाबा नियमित रूप से कमरे की सफाई करते हैं,उनका कहना है कि तख्त भले ही इस्तेमाल में नहीं आता, लेकिन उसकी देखभाल पूरी श्रद्धा के साथ की जाती है।कमरे को हमेशा साफ रखा जाता है ताकि उसकी ऐतिहासिक पहचान बनी रहे।



पुजारी क्या बताते हैं



मंदिर के पुजारी का कहना है कि यह कोई साधारण तख्त नहीं है,यह कई सौ साल पुराना है और हाथी की हड्डियों से बनाया गया था,जो भी इस पर बैठा,उसके साथ अच्छा नहीं हुआ। किसी की मानसिक हालत बिगड़ गई तो किसी की जान चली गई,इसी वजह से अब कोई भी व्यक्ति इस पर बैठने की हिम्मत नहीं करता।लोग दूर से ही हाथ जोड़कर इसे देखते हैं और वापस लौट जाते हैं।



नागा बाबा के बाद कोई नहीं बैठा



मंदिर के पुजारी का कहना है कि नागा बाबा इसी तख्त पर बैठकर लोगों का भला करते थे,उनके बाद किसी ने इस पर बैठने की हिम्मत नहीं की,जो भी बैठा,उसके बारे में तरह-तरह की बातें सामने आईं,इसी कारण लोगों के मन में इस तख्त को लेकर डर और सम्मान दोनों बने हुए हैं।लोग कहते हैं कि जान है तो जहान है, इसलिए कोई भी जोखिम नहीं लेना चाहता।



आज भी बना हुआ है रहस्य



समय बदल गया,दुनिया आगे बढ़ गई,लेकिन इस तख्त का रहस्य आज भी वैसा ही बना हुआ है।कोई इसे चमत्कार मानता है तो कोई लोककथा।कुछ लोग इसे सिर्फ एक पुरानी ऐतिहासिक धरोहर कहते हैं,जबकि कई लोग इसे आस्था से जोड़कर देखते हैं।सच क्या है,इसका पक्का जवाब किसी के पास नहीं है,लेकिन इतना जरूर है कि कौशांबी का यह छह पांव वाला तख्त आज भी लोगों की जिज्ञासा का बड़ा कारण बना हुआ है। हर साल बड़ी संख्या में लोग इसे देखने पहुंचते हैं, इसकी कहानी सुनते हैं और अपने-अपने विश्वास के साथ लौट जाते हैं।यही वजह है कि यह रहस्यमयी तख्त आज भी चर्चा का विषय बना हुआ है।


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