कबाड़ हो चुके मोबाइल पर टिका साइबर ठगी का धंधा, टब-कुर्सी का लालच देकर ठगी के धंधे का बना रहे हथियार

कबाड़ हो चुके मोबाइल पर टिका साइबर ठगी का धंधा, टब-कुर्सी का लालच देकर ठगी के धंधे का बना रहे हथियार

10 Apr 2026 |  14

 



कानपुर देहात।आज के डिजिटल युग में हर महीने नए मोबाइल फोन आ रहे हैं,ऐसे में पुराना फोन बेचना आम बात हो गई है।छोटे मोबाइल के बदले छोटा टब,बड़े मोबाइल के बदले बड़ा टब। अगर आपकी गली में भी ऐसे ही फेरी लगाने वाले आते हैं तो सावधान हो जाइए।कबाड़ हो चुके फोन के बदले टब और कुर्सी मिलने का लालच साइबर ठगी के धंधे का अहम हथियार तैयार कर रहा है।बता दें कि खराब हो चुके इन मोबाइल के सही पार्ट्स निकालकर एक कस्टमाइज फोन तैयार किया जाता है,इसे ही साइबर ठगी की घटनाओं को अंजाम देने के लिए इस्तेमाल किया जाता है।



जामताड़ा बने रेउना में पुलिस ने दबिश....



कानपुर देहात जिले में नया जामताड़ा बने घाटमपुर के रेउना गांव में पुलिस ने दबिश देकर 20 साइबर अपराधियों सहित 17 एंड्राइड फोन और चार की-पैड फोन बरामद किए हैं।इन्हें ऐसे ही खराब हो चुके मोबाइल फोन के सही पार्ट्स मिलाकर तैयार किया गया था,जिससे मोबाइल का मालिक कौन है इसको लेकर भी असमंजस की स्थिति बनी रहती थी,इनमें एंड्राइड फोन का इस्तेमाल वीडियो काल के जरिये साइबर ठगी और डिजिटल अरेस्ट जैसी घटनाओं को अंजाम देने के लिए किया जाता था,जबकि की-पैड फोन का इस्तेमाल काल के जरिये ठगी की घटनाओं को अंजाम देने के लिए किया जाता था।



जानें कैसे पहुंचते हैं ठगों तक मोबाइल



फेरी वाले आपको घरों से कबाड़ हो चुके मोबाइल फोन ले जाते हैं।इसके बाद इन्हें शहर में एक खास वेंडर को बेचते हैं, इनमें मौजूद सही पार्ट्स को निकाल लेते है। इसके बाद इन सही पार्ट्स के संयोजन से एक कस्टमाइज फोन तैयार किया जाता है।इसके बाद वेंडर के एजेंट साइबर ठगों से संपर्क करते हैं और पांच हजार रुपये से लेकर पचास हजार रुपये तक में इन्हें बेच देते हैं।



पुराने डाटा का करते हैं इस्तेमाल



कबाड़ हो चुके मोबाइल की मेमोरी में लोगों का डाटा सुरक्षित रहता है।कस्टमाइज मोबाइल तैयार करने वाला वेंडर इन डाटा को भी सुरक्षित तरीके से रिकवर कर लेता है और साइबर ठगों को मुंह मांगी कीमत पर बेचता है।साइबर ठग इन फोनों पर रिकवरी होने वाले नंबरों और डाटा को भी साइबर ठगी के लिए इस्तेमाल करते हैं।



मोबाइल के कोडवर्ड से तय होती थी गैंग में रैंक



मोबाइल के फीचर यह बताते थे कि साइबर ठग कितना बड़ा जालसाज है और ये साइबर ठगी की किन-किन वारदातों को अंजाम दे सकता है।मसलन काल पर साइबर ठगी करने का काम गैंगे में शामिल हुए प्रशिक्षुओं को दिया जाता था। इस काम के लिए उन्हें की-पैड वाला फोन मिलता था जो उनकी कोडवर्ड होता था।कुछ दिन ठगी के प्रशिक्षण के बाद इन्हें थोड़ी उच्च क्वालिटी का एंड्राइड फोन दिया जाता था। इसके जरिये वे पीड़ित के पोन पर लिंक भेजकर एनीडेस्क जैसे साफ्टवेयर डाउनलोड ओटीपी आदि की चोरी कर ठगी की वारदातों को अंजाम देते हैं।वहीं वीडियो काल पर ठगी और डिजिटल अरेस्ट करने वालों की गैंग में सबसे ऊंची रैंक होती है।इनके पास फ्लैगशिप फोन (सबसे उच्च क्वालिटी और उन्नत तकनीकी वाले स्मार्ट फोन) होते हैं। ये साइबर ठगी को वारदातों को अंजाम देने के साथ गैंग में भर्ती होने वाले को अपराध करने के तरीकों का प्रशिक्षण भी देते हैं।



मोबाइल फोन या स्मार्ट डिवाइस बेचने से पहले इन बातों का रखें ध्यान



 

मोबाइल फोन या स्मार्ट डिवाइस को फारमेट कर दें,अपनी ई-मेल आइडी से लेकर सभी जरूरी खातों से लागआउट कर लें,फोटो और बैंक खाते के बैकअप को पूरी तरह डिलीट कर दें,फोन इनक्रिप्टेड है या नहीं,अगर नहीं तो मैन्युअली इसे कर लें और अगर माइक्रो एसडी (मेमोरी कार्ड) लगा है तो इसे हटा लें।


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