चतरा जिले में निजी स्कूलों की अनियमितता पर प्रशासन ने कसा शिकंजा
किताबों से लेकर फीस और नामांकन तक हर व्यवस्था पर अब होगी कड़ी निगरानी
राइट टू एजुकेशन के तहत सभी निजी स्कूलों में 25% बीपीएल बच्चों का निःशुल्क नामांकन अनिवार्य
कंट्रोल रूम,मॉनिटरिंग कमिटी और निरीक्षण टीमों के साथ प्रशासन पूरी तरह अलर्ट
पूर्वांचल सूर्य प्रतिनिधि
चतरा। निजी विद्यालयों में वर्षों से चल रही मनमानी,अभिभावकों की बढ़ती शिकायतों,फीस वृद्धि और किताबों की खरीद बिक्री में अपारदर्शिता पर लगाम कसने के लिए सदर एसडीओ मोहम्मद जहूर आलम ने शनिवार को एक उच्चस्तरीय और बेहद निर्णायक बैठक आयोजित की। आयोजित बैठक में डीईओ दिनेश मिश्र,डीएसई रामजी कुमार और अनुमंडल क्षेत्र के सभी निजी विद्यालयों के प्रधानाचार्य उपस्थित रहे।बैठक के दौरान स्पष्ट कर दिया गया कि अब निजी विद्यालयों की किसी भी प्रकार की मनमानी,किताबों की खरीद,फीस वृद्धि, ड्रेस बदलाव, रि-एडमिशन चार्ज, प्रत्येक वर्ष गलत तरीके से नामांकन प्रक्रिया को बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।निजी विद्यालय संचालक किताबों के नाम पर अभिभावकों को लूटना बंद करें।
विद्यालयों को अब आईएसबीएन आधारित सूची वेबसाइट पर प्रकाशित करना अनिवार्य
एसडीओ मोहम्मद जहूर आलम ने कहा कि कई विद्यालय किताबों में अनावश्यक परिवर्तन कर अभिभावकों पर आर्थिक बोझ डालते हैं।इस पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाने का निर्देश दिया गया।
प्रशासन के प्रमुख आदेश
किताबें किसी एक दुकान पर खरीदने की बाध्यता नहीं रहेंगी। पुस्तकों को हर बुक स्टॉल पर उपलब्ध कराना अनिवार्य होगा।
प्रत्येक विद्यालय अपने नोटिस बोर्ड और वेबसाइट पर कक्षावार पुस्तक सूची आईएसबीएन नंबर,प्रकाशन विवरण।
संभावित मूल्य,अनिवार्य रूप से उपलब्ध कराए। केवल एनसीईआरटी/आईएसबीएन व नेप-2020 आधारित किताबें ही मुख्य रूप से अपनाई जाएँ। अतिरिक्त पुस्तकों के उपयोग से पहले समिति को जानकारी देना अनिवार्य होगा।
आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों के लिए बुक डोनेशन कैंप लगाना अनिवार्य होगा। पुराने किताबों के लिए बुक डोनेशन कैंप हर विद्यालय में महीने में कम से कम एक बार आयोजित करना होगा।
एसडीओ मोहम्मद जहूर आलम ने कहा की ज्ञात हुआ है कि अधिकांश निजी विद्यालय किसी विशेष पुस्तक दुकान से ही पुस्तकें खरीदने का दवा बनाते हैं जो की अवैधानिक है।
पुस्तकें केवल एक दुकान पर उपलब्ध करवाना अवैध है। किसी भी तरह का दबाव या कमीशन-आधारित व्यवस्था पाए जाने पर तत्क्षण कार्रवाई होगी।
फीस वृद्धि पर ज़ीरो टॉलरेंस
प्रशासन द्वारा यह निश्चित किया गया है कि बिना शुल्क समिति की अनुमति एक रुपये की बढ़ोतरी भी नहीं की जा सकेगी।
निजी स्कूलों में अनियंत्रित व मनमानी फीस वृद्धि को रोकने के लिए प्रशासन ने कठोर रुख अपनाया है।
मुख्य निर्देश विद्यालय शुल्क समिति की बैठक नियमित होगी और इसमें अभिभावकों की उपस्थिति अनिवार्य होगी।
बिना समिति की लिखित स्वीकृति फीस वृद्धि गैरकानूनी मानी जाएगी
कोई भी विद्यालय रि-एडमिशन चार्ज नहीं लेगा। फीस तालिका, भुगतान के नियम,वार्षिक शुल्क आदि की विस्तृत जानकारी विद्यालय वेबसाइट पर अपलोड करना अनिवार्य।
फीस विवादों की जांच हेतु अनुमंडल स्तरीय मॉनिटरिंग कमिटी तुरंत गठित की जाएगी। जिसकी अध्यक्षता जिला शिक्षा अधीक्षक और जिला शिक्षा अधिकारी संयुक्त रूप से करेंगे।
अनुमंडल अधिकारी ने चेतावनी भरे स्वर में कहा कि निजी विद्यालयों में हर वर्ष बिना किसी मापदंड के स्कूल फीस में वृद्धि कर दी जाती है,जिससे अभिभावकों की जेब पर अच्छा खासा आर्थिक बोझ पड़ता है। अब निजी विद्यालयों मेंफीस वृद्धि मनमर्जी से नहीं नियमों से होगी। शिकायत मिलने पर संबंधित विद्यालय के खिलाफ कठोर कार्रवाई तय है।
अवैध ड्रेस परिवर्तन पर रोक
आमतौर पर निजी विद्यालयों में स्कूल यूनिफार्म के नाम पर ड्रेस कोड हर वर्ष बदल दिए जाते हैं जिससे अभिभावकों को आर्थिक रूप से नुकसान उठाना पड़ता है। अब निजी विद्यालय ड्रेस के नाम पर आर्थिक बोझ नहीं डाल पाएंगे। कई विद्यालय हर वर्ष स्कूल ड्रेस में परिवर्तन करते आ रहे हैं, जिसके कारण अभिभावकों पर अनावश्यक आर्थिक बोझ बढ़ता है। प्रशासन ने इस पर भी पूर्ण रोक लगाने का आदेश जारी किया। प्रशासन द्वारा इस संदर्भ में कई प्रकार के आवश्यक निर्देश जारी किए गए हैं। जिनका अनुपालन करना प्रत्येक निजी विद्यालय के संचालकों को अनिवार्य होगा। यदि वे नियमों का अनुपालन नहीं करते हैं तो उनके विरुद्ध वैधानिक स्तर पर कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
ड्रेस में किसी प्रकार का अनावश्यक बदलाव पूर्णतः प्रतिबंधित
यदि किसी परिवर्तन की वास्तविक आवश्यकता हो, तो इसकी अनुमति समिति से पूर्व स्वीकृति के बाद ही।
शिक्षा के अधिकार अधिनियम 2009 का पालन अनिवार्य, 25% सीटें बीपीएल परिवारों के बच्चों के लिए आरक्षित।
एसडीओ ने सभी विद्यालयों को स्पष्ट निर्देश दिया कि
हर निजी विद्यालय को बीपीएल परिवारों के कम-से-कम 25% बच्चों का निःशुल्क नामांकन करना ही होगा। इसमें किसी भी प्रकार की बहानेबाजी या उल्लंघन बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
इस प्रक्रिया की रिपोर्ट प्रत्येक विद्यालय को समय पर प्रशासन को देनी होगी।
नामांकन अनियमितताओं को रोकने के लिए एडमिशन कंट्रोल रूम स्थापित
फोन पर होगी शिकायत की सुनवाई,अभिभावकों को सुविधा प्रदान करने के लिए अनुमंडल स्तर पर एडमिशन कंट्रोल रूम स्थापित किया जा रहा है।
यहां शिकायतें दर्ज होंगी
किताबों की अनियमितता,फीस वृद्धि,ड्रेस परिवर्तन,सीट आवंटन।
नामांकन संबंधी परेशानियां
कंट्रोल रूम से प्राप्त शिकायतों पर संबंधित अधिकारी उसी दिन कार्रवाई सुनिश्चित करेंगे।
नियमों के उल्लंघन पर विद्यालयों पर कार्रवाई तय
एसडीओ मोहम्मद जहूर आलम ने निर्देश दिया कि सभी बीडीओ अपने-अपने क्षेत्र के निजी विद्यालयों का निरंतर निरीक्षण करें और सुनिश्चित करें कि किताबें फीस,ड्रेस,नामांकन,RTE मानक का पालन सही ढंग से हो रहा हो।एसडीओ ने स्पष्ट कहा,अधिकारियों द्वारा निरीक्षण किया जाएगा। किसी भी लापरवाही पर संबंधित विद्यालय के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन अब किसी भी प्रकार की मनमानी बर्दाश्त नहीं करेगा।