विष्णुगढ़ में धर्म के नाम पर फैलाए जा रहे अंधविश्वास पर प्रशासन सख्त, सात दिनों का दिया अल्टीमेटम

विष्णुगढ़ में धर्म के नाम पर फैलाए जा रहे अंधविश्वास पर प्रशासन सख्त, सात दिनों का दिया अल्टीमेटम

06 Apr 2026 |  8

 



पूर्वांचल सूर्य प्रतिनिधि 



हज़ारीबाग़।विष्णुगढ़ प्रखंड क्षेत्र में इन दिनों धर्म और आस्था के नाम पर अंधविश्वास की घटनाएं लगातार हो रही हैं। हाल ही में विष्णुगढ़ थाना क्षेत्र के कुसुंभा की दर्दनाक घटना ने मानवता को शर्मशार करते हुए पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है।सवाल उठता है कि आखिर लोगों में अंधविश्वास की जड़ें कितनी गहरी हो चुकी हैं।विष्णुगढ़ पुलिस इन वारदातों को लेकर सख्त कार्रवाई करने जा रही है।



जानकारों का मानना है कि जब अंधविश्वास अपने नियंत्रण से बाहर हो जाता है तो नरबलि,हिंसा और डायन प्रथा जैसे जघन्य अपराधों का रुप ले सकता है। आज भी बड़ी संख्या में ग्रामीण अपनी बीमारी, पारिवारिक विवाद या आर्थिक संकट लेकर अस्पताल,थाना या अदालत जाने के बजाय ओझा-गुनी, भगत,झाड़ फूंक करने वाले, बाबा और भगताइन के पास पहुंचते हैं। मात्र 100 रुपये के डलिया (चावल और पूजा सामग्री) के सहारे तथाकथित झाड़-फूंक करने वाले लोग किसी की किस्मत बदलने,बीमारी ठीक करने या समस्या खत्म करने का दावा करते हैं। 



विष्णुगढ़ प्रखंड क्षेत्र में लगभग 99 गांवों में ही हर गांव में औसतन 2 से 3 भगत या भगताइन सक्रिय बताए जाते हैं। छोटे से क्षेत्र में ही सैकड़ों लोग इस तरह की गतिविधियों के जरिए अंधविश्वास को बढ़ावा दे रहे हैं। ग्रामीणों से छोटी रकम से शुरुआत कर बाद में बड़ी पूजा या तंत्र-मंत्र के नाम पर मोटी रकम वसूल ली जाती है। ग्रामीण उसे अपना रहनुमा समझ कर सबकुछ न्यौछावर कर देते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में एक प्रथा मनोकामना दबाना के नाम से भी चल रही है। इसमें व्यक्ति अपने घर से चावल और करीब 100 रुपये लेकर भगत या भगताइन के पास जाता है। इसके बाद चावल को तीन-चार हिस्सों में बांटकर भविष्य या भाग्य बताने का दावा किया जाता है। कई जगह चावल पर मंत्र पढ़कर रगड़ने जैसी क्रियाएं की जाती हैं। व्यक्ति को देवी के नाम पर संकल्प भी दिलाया जाता है। उसे भय भी दिखाया जाता है कि यदि मनोकामना पूरी होने पर देवी को बड़ी पूजा नहीं चढ़ाई गई तो समस्या और बढ़ सकती है। इसी भय से कई बार 25 हजार रुपये तक की पूजा, बलि या तंत्र-मंत्र कराने का दबाव बनाया जाता है। 



विशेषज्ञों का मानना है कि विष्णुगढ़ क्षेत्र में सामने आई कुसुंभा की घटना केवल एक आपराधिक घटना नहीं बल्कि उस सामाजिक मानसिकता का भी प्रतीक है, जहां अंधविश्वास,गरीबी और अशिक्षा मिलकर खतरनाक रूप ले लेते हैं। ऐसे मामलों में मासूम और कमजोर लोग सबसे ज्यादा प्रभावित होते हैं।



लगातार बढ़ती घटनाओं को देखते हुए विष्णुगढ़ प्रशासन और पुलिस ने बैठक कर सख्त रुख अपनाया है,जिसमें स्पष्ट किया गया कि जो भी व्यक्ति ओझा-गुनी, झाड़-फूंक, भगत-भगताइन या किसी भी रूप में ग्रामीण क्षेत्रों में अंधविश्वास फैला रहा है या उसे बढ़ावा दे रहा है, उसे 7 दिनों के भीतर अपनी गतिविधियां बंद करनी होंगी।यदि निर्धारित समय के भीतर यह गतिविधियां बंद नहीं की गईं तो पुलिस प्रशासन द्वारा कड़ी कार्रवाई की जाएगी और दोषियों को जेल भी जाना पड़ सकता है।



कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार अंधविश्वास के नाम पर लोगों को गुमराह कर पैसे ऐंठना या डराकर पूजा-पाठ के नाम पर वसूली करना कानूनन अपराध है। ऐसे मामलों में भारतीय दंड संहित के तहत धोखाधड़ी का मामला दर्ज हो सकता है, जिसमें 7 साल तक की सजा और जुर्माने का प्रावधान है।



इसके अलावा झारखंड में डायन प्रथा को रोकने के लिए विशेष कानून भी लागू है।झारखंड विचक्राफ्ट (डायन) प्रथा प्रतिषेध अधिनियम, 2001 के तहत किसी महिला को डायन कहकर प्रताड़ित करना,सामाजिक रूप से बहिष्कार करना या हिंसा करना गंभीर अपराध माना जाता है। इस कानून के तहत दोषी पाए जाने पर 3 महीने से लेकर 3 साल तक की सजा और जुर्माने का प्रावधान है। यदि डायन बताकर किसी व्यक्ति के साथ मारपीट या हत्या जैसी घटना होती है तो आरोपी पर हत्या सहित अन्य गंभीर धाराएं भी लग सकती हैं।



समाजसेवियों का कहना है कि केवल पुलिस कार्रवाई से समस्या पूरी तरह खत्म नहीं होगी। इसके लिए गांव-गांव में जागरूकता अभियान चलाना होगा और लोगों में वैज्ञानिक सोच विकसित करनी होगी।वहीं शोधकर्ताओं के अनुसार यह घटना समाज की उस मानसिकता को दिखाती है,जहां अंधविश्वास,गरीबी और अशिक्षा मिलकर एक खतरनाक तंत्र बना देते हैं।यदि समय रहते इस पर नियंत्रण नहीं किया गया तो भविष्य में ऐसी घटनाएं और भी भयावह रूप ले सकती हैं।



प्रशासन और सामाजिक संगठनों ने लोगों से अपील की है कि बीमारी या किसी भी समस्या के समाधान के लिए झाड़-फूंक या टोना-टोटका के बजाय डॉक्टर और कानून व्यवस्था पर भरोसा करें। जागरूकता और शिक्षा ही अंधविश्वास को खत्म करने का सबसे बड़ा उपाय है।



विष्णुगढ़ में चलाया जाएगा जागरूकता अभियान जो समाज को अंधविश्वास से मुक्त करने और भविष्य में कुसुंभ जैसी घटनाओं को रोकने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।


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